देश की खबरें | सिक्किम के लोग 2023 को विनाशकारी बाढ़ की वजह से याद रखेंगे

गंगटोक, 17 दिसंबर सिक्किम के लोगों ने 2023 में विभिन्न किस्म के उतार चढ़ाव देखे, जिनमें तीस्ता नदी में आई बाढ़, दलाई लामा की यात्रा, जी20 बैठक की मेजबानी और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन तक शामिल रहे।

उत्तर सिक्किम में चार अक्टूबर को बादल फटने से तीस्ता नदी में आई बाढ़ के बाद कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई, जबकि 77 अन्य लापता हो गए और हजारों लोग बेघर हो गए।

इस घटना में कम से कम 1,173 घर क्षतिग्रस्त हुए और 13 पुल बह गए, जबकि मंगन जिले में चुंगथांग पनबिजली बांध पूरी तरह से नष्ट हो गया। 25,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए जिन्होंने 22 राहत शिविरों में शरण ली।

हालांकि, एक दशक से अधिक समय के बाद दिसंबर में दलाई लामा की हिमालयी राज्य की यात्रा से तबाही से आहत लोगों को कुछ सांत्वना मिली और गंगटोक के पलजोर स्टेडियम में 30,000 लोगों ने बौद्ध दर्शन पर उनके उपदेश सुने।

सिक्किम ने अगस्त में जी20 की एक बैठक की मेजबानी की, जिस दौरान राज्य ने दुनिया के सामने अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया। निवेशकों ने हिमालयी राज्य में 1,000 करोड़ रुपये निवेश करने में रुचि दिखाई।

वर्ष की शुरुआत में सिक्किम की नौ वर्षीय बच्ची जेत्शेन दोहना लामा ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक प्रतिष्ठित रियलिटी गायन प्रतियोगिता जीती जिसके बाद राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। उनका स्वागत करने के लिए सड़क के दोनों ओर हज़ार लोग जुटे।

इसके साथ ही इस साल में राज्य को लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के रूप में नया राज्यपाल मिला, जिन्होंने 16 फरवरी को गंगा प्रसाद की जगह स्थान लिया।

सिक्किम के नेपालियों को "नेपाली मूल के विदेशी" बताने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ फरवरी में प्रदर्शन भी हुए। नागरिक समाज संगठन, राजनीतिक दल और समाज के सभी वर्ग फैसले से "विदेशी" शब्द को हटाने की मांग करने के लिए एक साथ आए, जिसके चलते बाद में फैसले से ‘विदेशी’ शब्द हटा दिया गया।

इस वर्ष नामची सरकारी कॉलेज के छात्र नेता पदम गुरुंग का शव एक नाले से मिलने के बाद जून में राज्य हिंसक प्रदर्शनों का गवाह बना।

विपक्षी राजनीतिक दलों और कई अन्य संगठनों ने घटना की सीबीआई जांच की मांग को लेकर विरोध रैलियां निकालीं।

गुरुंग के लिए न्याय की मांग को लेकर एक रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों के हिंसक हो जाने के बाद अगस्त में दक्षिण सिक्किम के नामची शहर में दंड संहिता प्रक्रिया (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज किया और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े।

वहीं, इस वर्ष महिलाओं के खिलाफ कई जघन्य अपराधों ने शांतिपूर्ण हिमालयी राज्य को हिलाकर रख दिया।

अप्रैल में गंगटोक शहर के पास पंगथांग इलाके में एक टैक्सी चालक ने नौ वर्षीय बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। घटना के वक्त वह स्कूल से लौट रही थी। राज्य की राजधानी के पास रानीपूल इलाके में 22 वर्षीय युवती के साथ एक टैक्सी चालक और उसके दो साथियों ने सामूहिक बलात्कार किया। दोनों मामलों के आरोपियों को पकड़ लिया गया।

इस साल राज्य में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं भी देखी गईं और विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने आरोप लगाया कि जब उसके सदस्य राजनीतिक बैठकों के लिए गए तो उन्हें पीटा गया और उन पर पथराव किया गया।

इस वर्ष एक अन्य महत्वपूर्ण घटना में, पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी और राजनीतिक नेता भाईचुंग भूटिया ने अपनी हमरो सिक्किम पार्टी का प्रमुख विपक्षी दल एसडीएफ में विलय कर दिया और 23 नवंबर को आधिकारिक तौर पर पार्टी में शामिल हो गए।

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