देश की खबरें | दिल्ली में कूड़े के ऊंचे पहाड़ से गाजीपुर के लोग साफ हवा के लिए कर रहे संघर्ष

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली में सबसे ऊंचे कूड़े के पहाड़ के साए में रह रहे गाजीपुर के लोगों में दमा, छाती में संक्रमण, सांस लेने में परेशानी और अन्य श्वास संबंधी बीमारियां आम है और उनकी मुश्किल में इस कूड़े के पहाड़ में बार-बार लगने वाली आग और इजाफा कर देती हैं तथा उन्हें सांस लेने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल दिल्ली में सबसे ऊंचे कूड़े के पहाड़ के साए में रह रहे गाजीपुर के लोगों में दमा, छाती में संक्रमण, सांस लेने में परेशानी और अन्य श्वास संबंधी बीमारियां आम है और उनकी मुश्किल में इस कूड़े के पहाड़ में बार-बार लगने वाली आग और इजाफा कर देती हैं तथा उन्हें सांस लेने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

चुनाव घोषणा पत्रों में नियमित रूप से गाजीपुर डम्पिंग यार्ड (कूड़ा फेंकने का स्थान) का मुद्दा शामिल रहा है और यह राजनीतिक आरोप-प्रत्योप का कारण बनता है लेकिन इसके आसपास के लोग लगातार स्वास्थ्य खतरे को लेकर शिकायत कर रहे हैं।

इस डम्पिंग यार्ड में 28 मार्च को आग लगी थी और करीब यह 50 घंटे तक बुझी नहीं। हालांकि, इससे जानमाल का नुकसान नहीं हुआ परंतु आसपास के लोगों को आसमान में छाई धुएं की मोटी परत की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा।

पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में कूड़े के ढेर के नजदीक रहने वाली 55 वर्षीय जुम्मल बताती हैं कि वह दमे की शिकार हैं और पिछले नौ साल से लगातार श्वास संक्रमण का सामना कर रही हैं।

उन्होंने बताया, ‘‘जब से सेहत की समस्या हुई है तब से मैंने घर से बाहर निकलना छोड़ दिया है। जब 28 मार्च को आग लगी तब सांस लेनी भी मुश्किल हो गई। हम केवल खिड़की बंद कर और घर में रहकर बचने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।’’

जुम्मल ने बताया, ‘‘उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से मिलने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।’’

प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि आग लगने की नवीनतम घटना के दौरान यहां रहने वाले लोग ‘या तो घरों में बंद थे या अस्पताल जाते नजर आए।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\