जम्मू, 16 अक्टूबर कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण भट का रविवार को यहां जब अंतिम संस्कार किया गया, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शोक संतप्त समुदाय ने घाटी में आतंकवादियों द्वारा लोगों की चुनकर हत्या को रोकने में सरकार की कथित नाकामी के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
भट की दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में चौधरी गुंड इलाके के उनके पैतृक आवास के बाहर शनिवार को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
जम्मू में शनिवार देर रात को भट के मुथी आवास पर उनके गमगीन परिजनों को उनका शव सौंपा गया।
पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार नारे लगाते हुए हजारों लोग भट के दो बच्चों श्रिया (बेटी) और शानू (बेटा) तथा अन्य परिजनों के साथ रविवार बन तालाब श्मशान घाट पर उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई देने उमड़ पड़े।
उन्होंने परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की, जिसमें 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने के अलावा सुरक्षा स्थिति सामान्य होने तक हिंदू कर्मचारियों को फौरन घाटी के बाहर स्थानांतरित करने की मांग शामिल है।
भट का शव जब श्मशान घाट पहुंचा, तो भट के कई रिश्तेदार फूट-फूटकर रो पड़े। श्रिया को अपने पिता के शव को चूमते हुए देखा गया, जबकि पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला उसका भाई अपने पिता को निहार रहा था।
शोकाकुल लोगों ने मंडल आयुक्त रमेश कुमार के साथ अन्य वरिष्ठ पुलिस और सिविल अधिकारियों के श्मशान घाट पर पहुंचने के तुरंत बाद घाटी में लक्षित हत्याओं को रोकने में कथित नाकामी के लिए प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाए।
भट के एक रिश्तेदार सतीश कुमार ने कहा, ‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक और कश्मीरी पंडित आतंकवादियों की गोलियों का निशाना बन गया, जिससे सुरक्षा स्थिति में सुधार होने के सरकार के झूठे दावों की पोल खुल गयी है। वह पिछले दो साल में मारे गए अल्पसंख्यक समुदाय के 18वें व्यक्ति हैं।’’
उन्होंने कहा कि जहां भट की हत्या की गयी, उसके नजदीक पुलिस की एक चौकी और सेना का एक शिविर है, जो यह दिखाता है कि घाटी में सुरक्षा स्थिति नब्बे के दशक की जैसी हो गयी है।
भट के एक अन्य रिश्तेदार ने कहा कि उन्हें लगता है कि आतंकवाद के पनपने के बाद घाटी न छोड़ना उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
कश्मीरी पंडित स्वयंसेवकों के एक सदस्य विक्रम कौल ने कहा कि सरकार को मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये के मुआवजे और एक नौकरी की फौरन घोषणा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार से सभी हिंदुओं को घाटी के बाहर तत्काल स्थानांतरित करने का भी अनुरोध करते हैं, क्योंकि वह उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रही है।’’
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