देश की खबरें | लोगों को लगता है कि मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने में नाकाम रही : पार्टी के विधायक

इंफाल, 15 फरवरी मणिपुर के एक वरिष्ठ भाजपा विधायक ने शनिवार को दावा किया कि राज्य के लोगों का मानना ​​है कि पार्टी मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद नया मंत्रिमंडल गठित करने में विफल रही, क्योंकि इस पद के लिए कई दावेदार थे।

बीरेन सिंह कैबिनेट में मंत्री रहे और उनके करीबी सहयोगी माने जाने वाले एल सुसिंड्रो मेइती ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री ने शायद इस उम्मीद के साथ इस्तीफा दिया है कि इस कदम से जातीय हिंसा प्रभावित राज्य में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी।

वर्ष 2017 से मणिपुर सरकार का नेतृत्व कर रहे सिंह ने 9 फरवरी की शाम दिल्ली से लौटने के कुछ घंटों बाद ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।

राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 37 विधायक हैं।

भाजपा के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा ने नेतृत्व संकट से निपटने के लिए तीन दिनों तक विधायकों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। हालांकि, 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और विधानसभा को निलंबित कर दिया गया।

मेइती ने कहा, ‘‘उनके इस्तीफे के पीछे कोई कारण अवश्य होगा। यह भी संभव है कि उन्होंने यह मानकर इस्तीफा दिया हो कि इससे राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद मिलेगी। यह सिर्फ मेरा अनुमान है। हालांकि, आम धारणा यह है कि कई विधायकों की मुख्यमंत्री पद की आकांक्षा के कारण सरकार गिर गई।’’

पूर्व उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति थी। उन्होंने कहा, ‘‘हर विधायक मुख्यमंत्री बनने के योग्य है, लेकिन मुख्यमंत्री का पद सिर्फ एक है। इसलिए त्याग की जरूरत है।’’

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशम मेघचंद्र ने भी शुक्रवार को दावा किया था कि भाजपा के भीतर नेतृत्व संकट और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर आम सहमति न बन पाने के कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।

भाजपा विधायक ने दावा किया कि राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच झड़पें कभी-कभी कुछ वर्गों के इशारे पर होती हैं।

मेइती ने कहा, ‘‘ऐसा कई बार हुआ है जब शांति भंग हुई है। जब शांति के कुछ संकेत मिलते हैं, तो कुछ अज्ञात तत्व नये सिरे से हिंसा भड़का देते हैं।’’

मई 2023 से अब तक हुई हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं।

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