देश की खबरें | पीडीएस घोटाला : गुप्त भूमिगत टंकी में छिपाकर रखा गया 20,000 लीटर से ज्यादा कैरोसीन बरामद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के करीब 50 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान शुक्रवार को जिला प्रशासन ने महू कस्बे के पास गुप्त भूमिगत टंकी में छिपाकर रखा गया 20,000 लीटर से ज्यादा कैरोसीन बरामद किया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

इंदौर (मध्य प्रदेश), 16 अक्टूबर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के करीब 50 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान शुक्रवार को जिला प्रशासन ने महू कस्बे के पास गुप्त भूमिगत टंकी में छिपाकर रखा गया 20,000 लीटर से ज्यादा कैरोसीन बरामद किया।

जिलाधिकारी मनीष सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि मुखबिर की सूचना से पता चला कि पीडीएस घोटाले के फरार मुख्य आरोपी मोहनलाल अग्रवाल (55) ने महू कस्बे से सात किलोमीटर दूर बिचौली क्षेत्र में एक भूखंड पर गुप्त भूमिगत टंकी बनवा रखी है। अग्रवाल, राज्य के नागरिक आपूर्ति निगम का पिछले 20 साल से परिवहनकर्ता बना हुआ था।

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उन्होंने बताया कि प्रशासन के दल ने जब मौके पर पहुंचकर छानबीन की, तो यह सूचना सही निकली। गुप्त भूमिगत टंकी में पीडीएस का 20,200 लीटर कैरोसीन छिपा कर रखा गया था जिसे बाहर निकलवाकर बरामद किया गया है।

सिंह ने बताया, "यह कैरोसीन की वह खेप है जो उचित मूल्य की सरकारी दुकानों में पहुंचने के बजाय अग्रवाल के गुप्त ठिकाने में पहुंच गयी। हम इस घोटाले में खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं।"

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गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने पीडीएस घोटाले में सितंबर के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत वारंट जारी करते हुए पुलिस को आदेश दिया था कि वह मुख्य आरोपी अग्रवाल को ढूंढकर गिरफ्तार करे और उसे शहर के केंद्रीय जेल भेज दे।

बहरहाल, अधिकारियों ने बताया कि महू का रहने वाला अग्रवाल अब तक फरार है।

अधिकारियों के मुताबिक प्रशासन ने महू क्षेत्र में एक शिकायत पर 17 अगस्त को अग्रवाल के बेटे की फर्म के गोदाम पर छापा मारा था और वहां से पीडीएस के चावल के 600 से अधिक बोरे बरामद किये गये थे।

उन्होंने बताया कि राज्य के नागरिक आपूर्ति निगम के परिवहनकर्ता के तौर पर अग्रवाल के पास उचित मूल्य की सरकारी दुकानों तक पीडीएस का राशन और कैरोसीन पहुंचाने का जिम्मा था।

आरोप है कि अग्रवाल और उसके कुछ साथी कारोबारियों ने दस्तावेजों के फर्जीवाड़े के जरिये चावल, गेहूं और कैरोसीन की करीब 50 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जिसमें उचित मूल्य की सरकारी दुकानों के संचालकों की भी मिलीभगत थी।

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