नयी दिल्ली, 13 सितंबर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने रविवार को कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य परितंत्र में भागीदारी पूर्णत: स्वैच्छिक होगी और इसे कभी भी लोगों के लिये अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह एक “झूठ है कि जो इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं होंगे उन्हें अस्पतालों में जाने की इजाजत नहीं होगी।”
उन्होंने “संडे संवाद” मंच पर अपने सोशल मीडिया ‘फॉलोअर के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, वर्धन ने कहा कि राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एनडीएचएम) सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों में से एक है और यह डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में ले जाएगा।
बयान में उनको उद्धृत करते हुए कहा गया, “हालांकि कुछ निहित स्वार्थ हैं जो नहीं चाहते कि भारत इस दिशा में सफल हो और वे एनडीएचएम के खिलाफ भ्रामक जानकारी संबंधी अभियान चला रहे हैं।”
बयान में कहा गया कि आशंकाओं को खारिज करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोरा झूठ है कि जो लोग इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं होंगे उन्हें अस्पताल में जाने की इजाजत नहीं होगी।
उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति या संस्थान इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं वे ठीक उसी तरह स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ उठाते रहेंगे जैसे वे अभी उठा रहे हैं।”
हर्ष वर्धन ने कहा, “राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य परितंत्र में भागीदारी पूरी तरह वैकल्पिक होगी और इसे कभी भी लोगों के लिये अनिवार्य नहीं किया जाएगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को अपने भाषण में महत्वाकांक्षी एनडीएचएम कार्यक्रम की घोषणा की थी।
कार्यक्रम के मुताबिक मिशन के लिये नामांकित हर व्यक्ति को एक स्वास्थ्य पहचान-पत्र मिलेगा जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उसकी पहुंच सुगम हो जाएगी।
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