जरुरी जानकारी | बजट 2021-22 पर संसद की लगी मुहर; सीतारमण ने कहा, भारत की वित्तीय साख को खतरा नहीं

नयी दिल्ली, 24 मार्च वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को विश्वास व्यक्त किया कि उच्च राजकोषीय घाटे के चलते देश की वित्तीय साख में गिराट का कोई जोखिम नहीं है। उन्होंने वित्त विधेयक 2021 पर राज्य सभा में चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि 2014 में पूर्व संप्रग शासन से विरासत में जो आर्थिक समस्याएं मिली थी उसे नरेंद्र मोदी सरकार ने ठीक किया है।

वित्त मंत्री के जवाब के बाद राज्यसभा ने वित्त विधेयक 2021 को बिना किसी संशोधन के सुझाव के लोकसभा को लौटा दिया । इसी के साथ संसद से आम बजट को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पूरी हो गयी है।

आगामी पहली अप्रैल से शुरू अगले वित्त वर्ष के लिये बजट में कर संबंधी प्रस्तावों से जुड़े वित्त विधेयक 2021 को लोकसभा मंगलवार को सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए कुछ संसोधनों के साथ मंजूर कर चुकी है।

विधेयक पर उच्च सदन में चर्चा हुई और उसके बाद बदलाव को लेकर बिना किसी सुझाव के उसे लोकसभा को भेज दिया गया।

चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये अतिरिक्त खर्च की वजह से राजकोषीय घाटा बढ़ने के बावजूद देश की वित्तीय साख में कमी किये जाने का कोई जोखिम नहीं देख रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की (सरकार की ऋण प्रतिभूतियों की) साख निवेश स्तर की है और हमें उच्च घाटे के कारण इसमें किसी प्रकार का बदलाव या उसमें (वैश्विक रेटिंग एजेंसियों द्वारा) कमी किये जाने कोई मामला नजर नहीं आता।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि उच्च घाटे का कारण अधिक खर्च और कर्ज में वृद्धि है।

सीतारमण ने कहा कि अर्थशास्त्रियों और रेटिंग एजेंसियों की राय है कि सरकार को महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाने के लिये खर्च करने की जरूरत है और देश ने उस सलाह को माना है।

हालांकि पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के साथ नोकझोंक के कारण सीतारमण अपना पूरा भाषण नहीं पढ़ पायीं।

टीएमसी सदस्या डोला सेन की बातों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बांग्ला में अपने जवाब में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों के नाम नहीं दिये जिससे उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिला। राज्य सरकार ने वहां के लोगों को केंद्र की स्वास्थ्य योजना का लाभ भी नहीं लेने दिया।

उनकी इस बात का तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने विरोध किया। सेन ने कहा, ‘‘हमने कभी इनकार नहीं किया...वह गुमराह कर रही हैं।’’

पश्चिम बंगाल में आसन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच जारी जुबानी जंग के बीच सेन ने बजट प्रस्तावों में कमियों को उठाया और जोर से ‘लज्जा’, ‘लज्जा’ कहा।

सीतारमण ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार बंगाल में गरीब किसानों को 10,000 करोड़ रुपये देना चाहती है लेकिन राज्य सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही है।’’

उन्होंने उसी का उपयोग करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने (सेन) ने लज्जा, लज्जा शब्द का उपयोग किया लेकिन मैं कहना चाहती हूं कि क्या किसानों को नकद राशि नहीं देने देना सही है? लज्जा लज्जा।’’

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