नयी दिल्ली, 22 दिसंबर संसद की एक समिति ने विदेश मंत्रालय से विदेशों में भारतीय नागरिकों का ‘डाटाबेस’ तैयार करने और उसे नियमित आधार पर अद्यतन करने को कहा है ताकि आपात स्थितियों में उसकी मदद ली जा सके।
लोकसभा में ‘2022-23 के लिए विदेश मंत्रालय की अनुदान की मांग’ पर विदेश मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति के 12वें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
भारतीय जनता पार्टी सांसद पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा, ‘‘प्रवासी भारतीयों की अत्यधिक संख्या के मद्देनजर किसी तरह की संकट की स्थिति में उनके फंसने की आशंका अधिक रहती है। अफगानिस्तान में हाल ही में उत्पन्न राजनीतिक संकट और यूक्रेन संघर्ष हमें यह याद दिलाने के लिये पर्याप्त है कि इन भारतीयों की सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने कहा कि हाल के दिनों में अफगानिस्तान और यूक्रेन में मंत्रालय द्वारा निभाई गई भूमिका सराहनीय रही है, ऐसे में उसका (समिति का) मानना है कि लोगों को प्रभावित देशों से निकालने की तैयारी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उभरी है।
समिति को इस बात की जानकारी है कि संघर्ष या किसी अन्य आपात स्थिति के दौरान भारतीय नागरिकों की निकासी योजना अलग-अलग मामलों के आधार पर बनाई जाती है और उन्हें बाहर निकालना कई कारकों पर निर्भर करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति की इच्छा है कि ‘‘विदेशों में भारतीय नागरिकों का एक ‘डाटाबेस’ तैयार किया जाए और आपातकालीन स्थितियों के लिए उसे नियमित आधार पर अद्यतन किया जाए।’’
संसदीय समिति ने आपात स्थिति में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए एक मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार करने को कहा जो विदेशों में सभी भारतीय मिशनों/पोस्ट पर उपलब्ध हो।
समिति ने मंत्रालय से इस दिशा में उठाए गए कदमों से अवगत कराने को भी कहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया कि मंत्रालय, विदेश में प्रवासी भारतीयों का रिकॉर्ड रखता है और उसे अद्यतन करता रहता है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘ एनआरआई, पीआईओ और छात्रों के संबंध में अलग अलग डाटाबेस बनाए जा रहे हैं। हालांकि इस तरह के आंकड़े की जांच विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वैच्छिक पंजीकरण पर निर्भर है।’’
दीपक
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