नयी दिल्ली, दो अगस्त संसद ने बुधवार को खनन और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2023 को मंजूरी दे दी जिसमें कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के खनन को निजी क्षेत्र को दिये जाने का प्रावधान है। इस दौरान सरकार ने आश्वासन दिया कि वह खनन क्षेत्र में पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध है।
राज्यसभा ने चर्चा के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा में यह पहले ही पारित हो चुका है।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए खान एवं खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश में तमाम खनिज होने के बावजूद इनका आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था, ‘‘यदि देश कच्चे तेल का आयात करता है तो यह उसकी विवशता है किंतु यदि हम कोयले का आयात करते हैं तो यह एक पाप है।’’
जोशी ने कहा कि देश में कोयले जैसे भू खनिजों का आयात भला क्यों किया जाता रहा? उन्होंने कहा, ‘‘यह सब नीतिगत पंगुता, भ्रष्टाचार, चाचा को फायदा पहुंचाओ, भतीजे को फायदा पहुंचाओ, मामा को फायदा पहुंचाओ..इन सबके कारण इनका आयात किया जाता रहा।’’
मंत्री ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार देश में 95 बेशकीमती खनिज हैं किंतु यह सब होते हुए भी भ्रष्टाचार के कारण देश इनका आयात करता रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसीलिए 2021 में एक कानून बनाकर कोयला एवं खनन क्षेत्र में व्यापक बदलाव किये हैं।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक में 24 महत्वपूर्ण खनिज की सूची बतायी गयी है।
जोशी ने विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि विश्व में 2050 तक लीथियम की मांग 965 प्रतिशत बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में इलेक्ट्रिक्ल वाहनों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य है और इनकी मांग में काफी वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए लीथियम और कोबाल्ट की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह संकल्प लिया है कि 2070 तक ‘नेट जीरो’ उर्त्सजन के लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा। इस लक्ष्य के लिए भी महत्वपूर्ण खनिजों का महत्व बढ़ जाता है।
जोशी ने कहा कि महत्वपूर्ण एवं गहराई में पाए जाने वाले खनिजों के खनन की नीलामी प्रक्रिया में सरकार ने बदलाव किए हैं जिससे इनके खनन को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज देश में खनन क्षेत्र में जितनी पारदर्शिता है शायद किसी अन्य देश में नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश में प्रति वर्ष 800 से 900 टन सोने का आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में सोना तो है किंतु बहुत गहराई में पाये जाने के कारण इसका आयात किया जाता है।
जोशी ने कहा कि इस विधेयक में गहराई में स्थित और महत्वपूर्ण खनिजों के खनन में निजी भागीदारी के लिए प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि खनिजों के मामले में कुछ राज्यों में खनन संबंधित नीलामी नहीं हो रही है और इसे लेकर केंद्र सरकार मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि खनन के क्षेत्र में ‘माफिया राज’ को खत्म करना है तो इस मामले में राज्य सरकारों को पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार खनन के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले, बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कुछ खनिजों का खनन अभी तक केवल सरकारी क्षेत्र में ही किया जाता रहा है किंतु इस विधेयक के माध्यम से इन खनिजों के खनन में निजी क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्य मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य की मांग के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। इस बीच विपक्ष के कुछ सदस्यों ने व्यवस्था का प्रश्न उठाने की आसन से अनुमति मांगी। किंतु उपसभापति हरिवंश ने यह कहते हुए अनुमति देने से मना कर दिया कि जब सदन में व्यवस्था ना हो तो व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस के अयोध्या रामी रेड्डी ने समर्थन करते हुए कहा कि इसके प्रावधानों से निवेशक किफायती ढंग से खनन कार्य कर सकेंगे।
हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आसन की अनुमति से अपनी बात रखते हुए मणिपुर हिंसा और हरियाणा के ताजा घटनाक्रम का उल्लेख करने का प्रयास किया। किंतु इसके बाद उपसभापति ने उन्हें विधेयक के अलावा कोई भी अन्य मुद्दा उठाने से मना कर दिया।
बाद में विपक्ष के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गये।
विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वी विजयसाई रेड्डी, तमिल मनीला कांग्रेस (एम) के जी के वासन, भाजपा के दीपक प्रकाश, बाबूराम निषाद, आदित्य प्रसाद, सुमित्रा वाल्मीक, जुगल सिंह लोखंडवाला और सकलदीप राजभर ने इसका समर्थन किया और खनन के मामले में राज्यों के अधिकार को सुनिश्चित किए जाने पर बल दिया।
‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023’ केंद्र सरकार को कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विशेष रूप से खनन पट्टे और समग्र लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार देता है।
जोशी ने यह विधेयक गत बुधवार को लोकसभा में पेश किया था।
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, यह संशोधन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्वेषण के सभी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुविधाजनक बनाएगा।
खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में पहले भी कई बार संशोधन किया जा चुका है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY