कोलकाता, 10 जुलाई पश्चिम बंगाल में 19 जिलों के उन करीब 700 मतदान केंद्रों (बूथ) पर पंचायत चुनाव के लिए सोमवार को पुनर्मतदान हुआ, जहां मतदान अमान्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, कहीं से भी किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मतपेटियों से छेड़छाड़ के आरोपों और हिंसा में 15 लोगों की मौत के बीच राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने 696 बूथ पर पुनर्मतदान का रविवार शाम को आदेश दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि पुनर्मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ। इसके लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और प्रत्येक मतदान केंद्र पर राज्य पुलिस के अलावा केंद्रीय बल के चार जवान तैनात हैं। अपराह्न एक बजे तक 30.54 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मतपेटियों के समय पर नहीं पहुंचने के कारण कुछ मतदान केंद्रों पर मतदान देर से शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे बूथ पर मतदान के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ जिन जिलों में पुनर्मतदान हुआ, वहां से किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। कुछ छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन पुलिस ने उन पर काबू पा लिया।’’
मालदा में, स्थानीय लोगों ने गाज़ोल प्रखंड के रानीगंज पंचायत के दोगाची में एक बूथ को अवरुद्ध कर दिया, जिससे पुनर्मतदान रुक गया। शनिवार को भी मतदान नहीं हो सका था, क्योंकि स्थानीय लोगों ने एक सड़क की मरम्मत की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था।
एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि शनिवार को मतदान नहीं हो सका, इसलिए पुनर्मतदान का आदेश दिया गया, लेकिन वह भी नहीं हो सका, क्योंकि स्थानीय लोगों ने बूथ पर ताला लगा दिया।
उन्होंने बताया कि नदिया के तेहट्टा में एक सड़क सुबह अवरुद्ध कर दी गई, लेकिन बाद में पुलिस ने अवरोध हटा दिया। उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के मयना में एक मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं ने प्रदर्शन किया।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने पुनर्मतदान की मांग करते हुए एसईसी को 6,000 बूथ की सूची सौंपी है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘टीएमसी के इशारे पर 18,000 बूथ पर गलत मतदान हुआ। हम और सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। हमारी सूची को राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन हम आश्चर्यचकित नहीं हैं। एसईसी ने जिन बूथ पर पुनर्मतदान की घोषणा की, उनकी सूची टीएमसी द्वारा सौंपी गई थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पर्याप्त वीडियो फुटेज के साथ विस्तृत साक्ष्य मतगणना के दिन मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय को सौंपे जाएंगे।’’
टीएमसी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव के दिन हिंसा विपक्षी दलों ने की थी। उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष प्रायोजित हिंसा से सबसे ज्यादा नुकसान टीएमसी को हुआ है। एसईसी की मांग के बावजूद केंद्रीय बल नहीं पहुंचे। आज का मतदान शांतिपूर्ण रहा और यह साबित करता है कि एसईसी ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं।’’
अधिकारियों ने बताया कि जिन जिलों में पुनर्मतदान की घोषणा की गई, उनमें मुर्शिदाबाद में सबसे अधिक 175 मतदान केंद्र और उसके बाद मालदा में 109 मतदान केंद्र हैं। नदिया में 89 मतदान केंद्र पर, कूच बिहार में 53, उत्तर 24 परगना में 46, उत्तर दिनाजपुर में 42, दक्षिण 24 परगना में 36, पूर्व मेदिनीपुर में 31 और हुगली में 29 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ।
उन्होंने बताया कि दार्जिलिंग, झाड़ग्राम और कलिम्पोंग जिलों में पुनर्मतदान का आदेश नहीं दिया गया।
उन्होंने बताया कि हिंसा तथा मतपेटियों व मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ की रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने रविवार शाम को इन 696 मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान कराने की घोषणा की थी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए शनिवार को 61,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ था। कई स्थानों पर मतपेटियां लूट ली गईं या उनमें आग लगा दी गईं और उन्हें तालाबों में फेंक दिया गया, जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी।
राज्य के ग्रामीण इलाकों की 73,887 सीट के लिए शनिवार को हुए मतदान में 5.67 करोड़ लोग मतदान करने के लिए पात्र थे।
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