Pakistan: पीएम इमरान खान के सहयोगी ने अमेरिका से कहा- पाकिस्तान के पास हैं अन्य विकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से टेलीफोन पर संपर्क करने की अनिच्छा से नाराज पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ ने कहा है कि अगर अमेरिकी नेता देश के नेतृत्व की अनदेखी करते रहे तो इस्लामाबाद के पास अन्य विकल्प हैं.
इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) के पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Prime Minister Imran Khan) से टेलीफोन पर संपर्क करने की अनिच्छा से नाराज पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ ने कहा है कि अगर अमेरिकी नेता देश के नेतृत्व की अनदेखी करते रहे तो इस्लामाबाद के पास अन्य विकल्प हैं. यहां डॉन अखबार के मुताबिक, युसूफ ने द फाइनेंशियल टाइम्स ऑफ लंदन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति ने ऐसे महत्वपूर्ण देश के प्रधानमंत्री से बात नहीं की है, जिसके बारे में अमेरिका खुद कहता है कि अफगानिस्तान समेत कुछ मामलों में वह बहुत महत्वपूर्ण है. हम इस संकेत को समझने नहीं पा रहे हैं."
उन्होंने कहा, "हमें हर बार कहा गया कि... (फोन पर) बात होगी, यह तकनीकी कारण है या जो भी हो, लेकिन स्पष्ट रूप से, लोग इस पर विश्वास नहीं करते हैं."हालांकि, उन्होंने विकल्पों के बारे में खुलकर नहीं बताया. उन्होंने कहा, "अगर एक फोन कॉल मेहरबानी है, अगर सुरक्षा संबंध भी मेहरबानी का मामला है, तो, ऐसे में पाकिस्तान के पास अन्य विकल्प हैं.” यह भी पढ़ें: Pakistan: इमरान खान ने अब्दुल कयूम नियाजी को बनाया PoK का नया प्रधानमंत्री, भारत जता चुका है विरोध
हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान को आश्वासन दिया है कि अमेरिका अफगानिस्तान में शांति बहाल करने में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करता है और चाहता है कि पाकिस्तान वह भूमिका निभाए. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, "पाकिस्तान के पास हासिल करने के लिए बहुत कुछ है और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा और अच्छे परिणाम को लेकर भूमिका निभाने के लिए अच्छी स्थिति में होगा. "
उन्होंने कहा, "हम इस पर काम करना जारी रखेंगे और अपने पाकिस्तानी सहयोगियों के साथ करीबी संवाद करेंगे, लेकिन द फाइनेंशियल टाइम्स की मंगलवार की रिपोर्ट के मुताबिक, यूसुफ ने राष्ट्रपति बाइडन द्वारा प्रधानमंत्री खान से संपर्क नहीं करने को लेकर शिकायत की. गौरतलब है कि अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान पर कब्जा करने से रोकने के लिए मदद मांगी थी.
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