देश की खबरें | ओजोन परत में सुधार धीमा पड़ा, सतह पर यूवी विकिरणों का स्तर बढ़ा : अनुसंधान

नयी दिल्ली, दो जून एक नए अनुसंधान में दावा किया गया है कि ओजोन परत में उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं हो रहा है और यही कारण है कि हाल के वर्षों में सतह पर पराबैंगनी (अल्ट्रावायलट या यूवी) विकिरणों के स्तर में वृद्धि देखने को मिली है।

वैज्ञानिकों ने इस सदी के मध्य तक ओजोन परत के पूरी तरह से बहाल होने का अनुमान जताया था। हालांकि, अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि वर्ष 2010 के बाद से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और उत्तरी मध्य अक्षांश के देशों में पराबैंगनी विकिरणों का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

चीन स्थित बीजिंग नॉर्मल विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता यान शिया ने कहा, “हमारा विश्लेषण दिखाता है कि पिछले एक दशक से अधिक समय से ओजोन परत में सुधार नहीं हो रहा है और सतह पर पराबैंगनी विकिरणों का स्तर लगातार बढ़ रहा है। समतापमंडलीय ओजोन की धीमी बहाली काफी हद तक अवांछित है।”

यह अनुसंधान ‘एडवांसेज इन एटमॉसफीयरिक साइंसेज’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसमें दुनियाभर में ओजोन परत और परबैंगनी विकिरणों के स्तर में होने वाले दीर्घकालिक बदलावों का आकलन करने के लिए उपग्रह डेटा और मॉडल अध्ययन का सहारा लिया गया है।

शिया ने कहा, “अनुसंधान के दौरान हमने 2010 के बाद 30 डिग्री दक्षिण और 60 डिग्री उत्तर अक्षांश के बीच ओजोन परत में क्षरण और पराबैंगनी विकिरणों के स्तर में वृद्धि दर्ज की।”

उन्होंने कहा, “खासतौर पर उत्तरी अक्षांश में 2011 से 2020 के बीच सतह पर पराबैंगनी विकिरणों के स्तर में वृद्धि की दर बढ़कर 0.5 प्रतिशत से 1.4 प्रतिशत प्रति वर्ष हो गई और इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।”

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ओजोन परत में सुधार की गति क्यों धीमी पड़ गई है और क्या यह रुझान आगे भी देखने को मिलेगा, इसके बारे में बेहतर समझ हासिल करने के लिए ओजोन परत और पराबैंगनी विकिरणों के स्तर पर लगातार नजर बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं और आम जनता को सतह पर पराबैंगनी विकिरणों के स्तर में वृद्धि और इससे पर्यावरण, खेती और जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभावों से अवगत होना चाहिए, ताकि वे इससे निपटने के लिए जरूरी तैयार कर सकें।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक, इस अनुसंधान के नतीजे याद दिलाते हैं कि ओजोन परत में सुधार एक जटिल प्रक्रिया है, जो ग्लोबल वार्मिंग सहित अन्य कारकों से प्रभावित होती है और इसमें पूरी तरह से सुधार को लेकर अनिश्चितता बरकरार है।

उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में इन खतरनाक रुझानों को पलटने, पराबैंगनी विकिरणों के स्तर में कमी लाने और धरती पर मौजूद जीवों की रक्षा करने के लिए लगातार अनुसंधान करने और मॉनट्रियाल प्रोटोकॉल जैसी नीतियां लागू करने की जरूरत है।

मॉनट्रियाल प्रोटोकॉल ओजोन परत में क्षरण के लिए जिम्मेदार विभिन्न तत्वों के उत्पादन को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से बंद कर इसकी (ओजोन परत की) रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)