चंडीगढ़, सात नवंबर पंजाब में मंगलवार को खेतों में पराली जलाने की 1,500 से अधिक घटनाएं सामने आयी, जबकि हरियाणा के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।
लुधियाना स्थित पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को खेतों में पराली जलाने के 1,515 मामले सामने आने के बाद प्रदेश में इस तरह के कुल ममालों की सख्या बढ़ कर 20,978 पर पहुंच गयी है ।
प्रदेश में मंगलवार को 1,515 पराली जलाने की घटनाओं में, संगरूर में 397, बरनाला में 147, मनसा में 137, बठिंडा में 129, फिरोजपुर में 97, मोगा में 93 और लुधियाना में 86 मामले शामिल हैं।
प्रदेश में 2021 और 2022 में आज के दिन पराली जलाने की क्रमश: 5,199 और 2,487 मामले सामने आये थे ।
पंजाब में 15 सितंबर से सात नवंबर तक खेतों में पराली जलाने की कुल 20,978 घटनायें हुयी हैं । इनमें से संगरूर पहले स्थान पर है जहां सबसे अधिक 3,604 मामले सामने आये हैं । इसके बाद फिरोजपुर में 2,073, तरनतारन में 1,847, मनसा में 1,588, अमृतसर में 1,444, पटियाला में 1,418 और बठिंडा में 1,215 मामले हैं।
इस बीच, हरियाणा के फतेहाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 421 दर्ज किया गया, इसके बाद हिसार में 403, जींद में 384, सोनीपत में 381, कैथल में 377, फरीदाबाद में 374, गुरुग्राम में 364, भिवानी में 361, सिरसा में 334, पानीपत में 328 और रोहतक में 326 दर्ज किया गया।
पंजाब में, बठिंडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 343 दर्ज किया गया, इसके बाद मंडी गोबिंदगढ़ में 299, जालंधर में 252, पटियाला में 250, लुधियाना में 239, अमृतसर में 205 और खन्ना में 203 दर्ज किया गया।
पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में एक्यूआई 159 दर्ज किया गया।
शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ जबकि 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है।
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