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देश की खबरें | समलैंगिक विवाह को हमारा कानून, समाज और मूल्य मान्यता नहीं देते हैं : केन्द्र ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि समलैंगिक विवाह की ‘‘अनुमति नहीं है’’ क्योंकि ‘‘हमारा कानून, हमारी न्याय प्रक्रिया, समाज और हमारे नैतिक मूल्य’’ इसे मान्यता नहीं देते हैं।

देश की खबरें | समलैंगिक विवाह को हमारा कानून, समाज और मूल्य मान्यता नहीं देते हैं : केन्द्र ने अदालत से कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 सितंबर केन्द्र ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि समलैंगिक विवाह की ‘‘अनुमति नहीं है’’ क्योंकि ‘‘हमारा कानून, हमारी न्याय प्रक्रिया, समाज और हमारे नैतिक मूल्य’’ इसे मान्यता नहीं देते हैं।

समलैंगिक विवाह को हिन्दू विवाह अधिनियम और विशेष विवाह अधिनियम के तहत मान्यता देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष ये बातें कहीं।

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याचिका में किये गये अनुरोध का विरोध करते हुए मेहता ने कहा, ‘‘हमारे कानून, हमारी न्याय प्रणाली, हमारा समाज और हमारे मूल्य समलैंगिक जोड़े के बीच विवाह को मान्यता नहीं देते हैं। हमारे यहां विवाह को पवित्र बंधन माना जाता है।’’

उन्होंने कहा कि ऐसे विवाहों को मान्यता देने और उनका पंजीकरण कराने की अनुमति दो अन्य कारणों से भी नहीं दी जा सकती है। पहला... याचिका अदालत से इस संबंध में कानून बनाने का अनुरोध कर रही है। दूसरा इन्हें दी गयी कोई भी छूट ‘‘विभिन्नन वैधानिक प्रावधानों के विरूद्ध होगी।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘जबतक कि अदालत विभिन्न कानूनों का उल्लंघन ना करे, ऐसा करना संभव नहीं होगा।’’

मेहता ने यह भी कहा कि हिन्दू विवाह अधिनियम में भी विवाह से जुड़े विभिन्न प्रावधान संबंधों के बारे में पति और पत्नी की बात करते हैं, समलैंगिक विवाह में यह कैसे निर्धारित होगा कि पति कौन है और पत्नी कौन।

पीठ ने यह माना कि दुनिया भर में चीजे बदल रही हैं, लेकिन यह भारत के परिदृश्य में लागू हो भी सकता है और नहीं भी।

अदालत ने इस संबंध में जनहित याचिका की जरुरत पर भी सवाल उठाया। उसका कहना है कि जो लोग इससे प्रभावित होने का दावा करते हैं, वे शिक्षित हैं और खुद अदालत तक आ सकते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हम जनहित याचिका पर सुनवायी क्यों करें।’’

याचिका दायर करने वालों के वकील ने कहा कि प्रभावित लोग समाज में बहिष्कार के डर से सामने नहीं आ रहे हैं इसलिए जनहित याचिका दायर की गयी है।

अदालत ने वकील से कहा कि वह उन समलैंगिक जोड़ों की सूचना उन्हें दे जो अपने विवाह का पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं।

अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 14, 2020 04:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).