नयी दिल्ली, 20 मई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले से संबंधित अध्यादेश का शनिवार को बचाव किया और कहा कि यह संविधान और इस मामले में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप है।
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अध्यादेश लाने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर पलटवार किया।
भाटिया ने संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने कहा था कि यदि "संसद किसी विषय पर कार्यकारी शक्ति प्रदान करने वाला कानून बनाती है", तो उपराज्यपाल की शक्ति को तदनुसार संशोधित किया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि यह अध्यादेश जनहित में है। इस अध्यादेश को छह महीने के अंदर संसद की मंजूरी चाहिए होगी।
भाटिया ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, "आपने न तो संविधान पढ़ा है और न ही उच्चतम न्यायालय का फैसला। आपको लगता है कि अरविंद केजरीवाल जो कुछ भी कहते हैं, वह देश के संविधान से ऊपर है।"
भाटिया ने कहा कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, संविधान के अनुच्छेद 239एए के अनुसार संसद इस क्षेत्र पर विशेष अधिकार रखती है। यह दिल्ली "अरविंद क्षेत्र" नहीं है और इसे संविधान द्वारा चलाया जाएगा, उनकी मरजी से नहीं।”
इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के इस अध्यादेश को ‘‘असंवैधानिक’’ और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए शनिवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार उच्चतम न्यायालय में इसको चुनौती देगी।
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सेवाओं के मामले में केंद्र का अध्यादेश असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ है। हम इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उच्चतम न्यायालय के ग्रीष्मावकाश के कारण बंद होने के कुछ ही घंटों बाद सेवाओं के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को पलटने के लिए केंद्र ने अध्यादेश जारी किया।’’
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