देश की खबरें | बलात्कार पीड़िता को 10 लाख रु मुआवजा देने का आदेश; दोषी को आजीवन कारावास
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने 2021 में एक नाबालिग के अपहरण और बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनायी और कहा कि एक स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि पॉक्सो कानून का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
नयी दिल्ली, छह मार्च दिल्ली की एक अदालत ने 2021 में एक नाबालिग के अपहरण और बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनायी और कहा कि एक स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि पॉक्सो कानून का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील बाला डागर ने 31 वर्षीय दोषी के खिलाफ मामले की सुनवाई की जिसे बलात्कार, अपहरण और आपराधिक धमकी के अपराधों के लिए पोक्सो अधिनियम और आईपीसी की धारा 6 के तहत दंडित किया गया है।
पोक्सो पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना पर अदालत ने कहा कि पीड़ितों की पीड़ा की कोई कीमत नहीं हो सकती।
अदालत ने कहा, ‘‘किसी भी लाभकारी योजना या कानून में अधिकतम की अवधारणा नहीं हो सकती। पीड़ित की पीड़ा की कीमत कैसे लगायी जा सकती है? मुआवजे की कोई भी राशि उसके दुख को कम नहीं कर सकती। पीड़ित की मदद के लिए कम से कम इतना तो किया ही जा सकता है कि उसकी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाया जाए।’’
अदालत ने यह कहते हुए 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया ताकि इससे पीड़िता के पुनर्वास में मदद मिल सके।
अतिरिक्त लोक अभियोजक योगिता कौशिक दहिया ने दलील दी कि दोषी को इस निंदनीय और घृणित कृत्य के लिए कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि उसने 26 जुलाई, 2021 को लड़की को खाने का लालच देकर उसका अपहरण कर लिया था।
दहिया ने दलील दी कि दोषी ने नाबालिग को चाकू दिखाकर धमकाते हुए उसके साथ बलात्कार किया। अभियोजक ने कहा कि उसे (व्यक्ति को) उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने भी बलात्कार का दोषी ठहराया था।
अदालत ने पांच मार्च को पारित अपने फैसले में कहा, ‘‘पॉक्सो अधिनियम का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को उसके कृत्य के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा, यौन उत्पीड़न कृत्य के लिए दंड लगाकर समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए। वर्तमान मामले में, दोषी में यौन इच्छा की विकृत भावना पायी गयी है।’’
अदालत ने कहा कि बच्चों को यौन शोषण से बचाना समाज की जिम्मेदारी है, क्योंकि इस तरह के दुर्व्यवहार के मनोवैज्ञानिक निशान अमिट होते हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘अपराध की गंभीरता, पीड़ित और दोषी की उम्र, दोषी की पहले भी इसी तरह के अपराध में संलिप्तता, उन्हें नियंत्रित करने वाले सामाजिक और आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, दोषी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।’’
दोषी को अपहरण और आपराधिक धमकी के अपराधों के लिए सात-सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनायी गई, जिसे एक साथ चलाने का निर्देश दिया गया।
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