नयी दिल्ली,15 नवंबर विपक्षी दलों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) प्रमुखों का कार्यकाल विस्तारित करने के सरकार के कदम का विरोध करने का सोमवार को संकल्प लिया।
उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरूपयोग करने के लिए संसद की अनदेखी कर रही, संविधान में तोड़ मरोड़ कर रही और ‘अध्यादेश राज’ का सहारा ले रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि संसद के (शीतकालीन) सत्र से महज दो सप्ताह पहले अध्यादेश लाना संसद का अनादर करना है।
विपक्षी दलों ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश की अनदेखी करने की कोशिश कर रही है कि कार्यकाल में कोई भी विस्तार संक्षिप्त अवधि के लिए होगा और जारी जांच को बढ़ाने के लिए ‘सिर्फ दुर्लभ या अपवाद वाली परिस्थितियों में ही ऐसा किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि विपक्षी दल भारत को एक निर्वाचित तानाशाही में तब्दील होने से रोकने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे।
पार्टी ने रविवार को जारी अध्यादेशों का विरोध करते हुए राज्यसभा में सांविधिक संकल्पों के लिए दो नोटिस दिये हैं। इन अध्यादेशों में कहा गया है कि ईडी और सीबीआई प्रमुखों का दो साल का निर्धारित कार्यकाल समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार एक-एक साल कर लगातार तीन साल के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा सकती है।
सिंघवी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार विपक्ष को निशाना बनाते हुए, खुद को और अपने मित्रों को बचाने के लिए संसद को दरकिनार कर रही है तथा उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन सिर्फ जांच एजंसियों का दुरूपयोग करने के लिए कर रही है।
हालांकि, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जो इस तरह की नकारत्मक और विध्वंसकारी राजनीति करते हैं उससे सिर्फ उन्हें ही नुकसान होगा।
वाम दलों ने अध्यादेशों को फौरन निरस्त करने की मांग की।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार को कहा, ‘‘माकपा पोलित ब्यूरो अध्यादेश लाये जाने की निंदा करता है।’’
इसने कहा, ‘‘यह दुखद है कि इन अध्यादेशों को 29 नवंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र के ठीक पहले लाया गया है। भाजपा का नियमित रूप से अध्यादेश राज का सहारा लेना लोकतंत्र विरोधी है।’’
पार्टी ने आरोप लगाया कि सीबीआई और ईडी, दोनों ही सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम कर रहे हैं ताकि उनके एजेंडा को आगे बढ़ाया जा सके।
इसने एक बयान में कहा, ‘‘विपक्षी दलों के नेताओं को नियमित रूप से निशाना बनाया जाता है। यह कदम इन एजेंसियों को स्वायत्ता को और कम करने के लिए और मुख्य अधिकारियों को और अधिक कमजोर करने के लिए है।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी कहा कि वह अध्यादेशों के खिलाफ सांविधिक संकल्प का नोटिस देने पर विचार कर रही है।
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