देश की खबरें | ऑनलाइन कक्षाओं, शुल्क वृद्धि को लेकर विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, छात्रों ने चिंता जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों के एक वर्ग ने कोविड-19 महामारी के बीच ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन, शुल्क वृद्धि तथा बुनियादी ढांचे की कमी पर मंगलवार को चिंता जाहिर की।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 अगस्त राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों के एक वर्ग ने कोविड-19 महामारी के बीच ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन, शुल्क वृद्धि तथा बुनियादी ढांचे की कमी पर मंगलवार को चिंता जाहिर की।

दिल्ली विश्वविद्यालय स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम सेमिस्टर के छात्रों के लिए खुली किताब से परीक्षा करा रहा है।

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छात्रों और शिक्षकों ने इस कदम का विरोध किया है और वे परीक्षाएं रद्द करने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने तीसरे और पांचवें सेमिस्टर के छात्रों के लिए 10 अगस्त से ऑनलाइन कक्षाएं भी शुरू कर दी हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर आभा देब हबीब ने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला लेने की प्रक्रिया में शिक्षकों और छात्रों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

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उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘छात्रों के बारे में सोचे बिना खुली किताब से ऑनलाइन परीक्षाएं कराने का फैसला लिया गया। कश्मीर में रहने वाले छात्रों और बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे विद्यार्थियों का क्या होगा? छात्रों के पास ऑनलाइन कक्षाओं के लिए साधन नहीं हैं।’’

दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा उन्नी माया ने कहा कि विश्वविद्यालय ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सोचे बिना ऑनलाइन कक्षाएं कराने का फैसला ले लिया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षण प्रक्रिया की या कश्मीर के छात्रों की फिक्र नहीं है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा भी नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एमबीए और इंजीनियरिंग के छात्रों से लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं जबकि वे प्रयोगशालाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे।

आंबेडकर विश्वविद्यालय के शुभोजीत डे ने कहा कि उन्होंने छात्रों के बीच एक सर्वे कराया और पाया कि 48 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, वहीं दो प्रतिशत के पास ऑनलाइन कक्षाओं के लिए कोई उपकरण नहीं है।

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