नयी दिल्ली, 20 सितंबर मजबूत संरक्षण तंत्र, वन्यजीव अपराध कानूनों को सख्ती से लागू करने और प्राकृतिक वास के विस्तार के कारण भारत और नेपाल में एक सींग वाले गैंडों की आबादी लगातार बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
अमेरिका स्थित ‘इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन’ (आईआरएफ) द्वारा विश्व गैंडा दिवस से पहले ‘राइनो स्थिति रिपोर्ट-2023’ जारी की गई है। विश्व गैंडा दिवस 22 सितंबर को गैंडों की पांच प्रजातियों और उनके संरक्षण का वार्षिक वैश्विक उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार गैंडों की आबादी में गिरावट का कारण बनने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण कारक अवैध शिकार और प्राकृतिक वास के स्थान का नुकसान हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन भी उनके अस्तित्व के कई पहलुओं पर तेजी से प्रभाव डाल रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘अवैध शिकार अब भी गैंडों की सभी पांच प्रजातियों - काले, सफेद, बड़े एक सींग वाले, सुमात्रा (गैंडों) और जावा (गैंडों) - के लिए खतरा है और यह कई ऐसे क्षेत्रों में बढ़ गया है जिन्हें पहले लक्षित नहीं किया गया था।’’
रिपोर्ट में हालांकि कुछ सकारात्मक पहलुओं की ओर भी इशारा किया गया है।
‘इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन’ के मुताबिक मजबूत संरक्षण प्रणाली और अवैध शिकार के खिलाफ कड़े कानूनों के कारण एक सींग वाले बड़े गैंडों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रहा है। भारत और नेपाल की सरकारों ने हालांकि इस साल गैंडों की आधिकारिक रूप से गणना नहीं की, अधिकारियों का मानना है कि गैंडों की आबादी बढ़ रही है।
भारत, भूटान और नेपाल एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए सीमा पार प्रबंधन रणनीति को लागू करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
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