नयी दिल्ली, दो अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के विधानसभा में एक बयान को लेकर बुधवार को अप्रसन्नता जताई जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यदि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायक पाला बदल भी लें तो भी उपचुनाव नहीं होंगे।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, ‘‘अगर यह बात सदन में कही गई है, तो आपके मुख्यमंत्री दसवीं अनुसूची का मजाक उड़ा रहे हैं।’’
संविधान की दसवीं अनुसूची दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रावधानों से संबंधित है।
रेड्डी ने 26 मार्च को विधानसभा में कथित तौर पर कहा था कि बीआरएस सदस्यों के पाला बदलने पर भी उपचुनाव नहीं होंगे, जिसके बाद न्यायमूर्ति गवई ने यह सख्त टिप्पणी की है।
यह मुद्दा तब सामने आया जब पीठ उन याचिकाओं पर दलीलें सुन रही थी, जिनमें कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस के कुछ विधायकों को अयोग्य ठहराने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर निर्णय लेने में तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कथित देरी का मुद्दा उठाया गया है।
बीआरएस नेता पी कौशिक रेड्डी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुंदरम ने रेड्डी के कथित बयान का हवाला दिया।
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में लंबित मामले में विधानसभा की कार्यवाही पर सवाल नहीं उठाया गया है। न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘रामलीला मैदान में कही गई बात सदन में कही गई बात से भिन्न होती है।’’
न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि जब कोई नेता विधानसभा में कुछ कहता है, तो उसकी कुछ गरिमा होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले हैं जिनमें कहा गया है कि सदन में किसी मंत्री के बयान का इस्तेमाल उस कानून की व्याख्या के लिए किया जा सकता है।
सुंदरम ने रेड्डी को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं सदस्यों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उन्हें उपचुनावों के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कोई उपचुनाव नहीं होगा। अगर बीआरएस अपनी सीटों के लिए उपचुनाव कराना चाहेगी, तो भी कोई उपचुनाव नहीं होगा। अगर उनके सदस्य पाला बदल भी लेंगे, तो भी कोई उपचुनाव नहीं होगा।’’
रोहतगी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की ओर से पेश नहीं हो रहे हैं। न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘रोहतगी, आप उस मामले में एक बार मुख्यमंत्री की ओर से पेश हुए थे, और बेहतर होगा कि आप आगाह करें कि दोबारा ऐसा न हो, अन्यथा हम जानते हैं कि हम अवमानना नोटिस जारी करने में धीमे हैं, लेकिन हम शक्तिहीन नहीं हैं।’’
पिछले साल अगस्त में एक अलग मामले की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामलों में बीआरएस नेता के कविता को जमानत देने पर रेड्डी की टिप्पणियों को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी।
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