देश की खबरें | शिक्षा को राज्य सूची से हटाने के संशोधन पर उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका विचारार्थ स्वीकार की

चेन्नई, 14 सितंबर मद्रास उच्च न्यायालय ने एक सेवा संगठन और सत्तारूढ़ द्रमुक के एक विधायक की जनहित याचिका मंगलवार को विचारार्थ स्वीकार कर ली और इस पर नोटिस जारी किया। याचिका में संविधान (42वें संशोधन) कानून 1976 की धारा 57 को असंवैधानिक घोषित करने का आग्रह किया गया है। इस संशोधन में शिक्षा को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डाल दिया गया था।

तमिलनाडु सरकार को मामले में प्रतिवादी के तौर पर शामिल करने के बाद मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पी. डी. औदिकेशावालु ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किये और उन्हें आठ हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि मामले पर सुनवाई दस हफ्ते बाद होगी।

द्रमुक नेता डॉ. एन. इझिलन ने जनहित याचिका में संविधान (42वां संशोधन) के अनुच्छेद 57 को चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि ‘‘शिक्षा’’ के विषय पर राज्यों को पूर्ण अधिकार देने का कारण था कि राज्य सरकार ही लोगों की जरूरतों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की आकांक्षाओं को समझती है और खामियों को दूर करती है तथा ऐसे नियम बनाती है जो जरूरत के मुताबिक हो।

संविधान निर्माताओं ने संविधान सभा में इस बात पर बहस की थाी कि इस विषय को केंद्र सूची में, समवर्ती सूची में या फिर राज्य सूची में शामिल किया जाए। गहन विचार-विमर्श के बाद संविधान सभा ने सभी प्रस्तावित संशोधनों को खारिज कर दिया था और इस तर्क को तरजीह दी कि ‘‘शिक्षा’’ मुख्यत: राज्य का विषय है और केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि इसी मुताबिक संविधान सभा ने शिक्षा को राज्य सूची में डाला। लेकिन 1976 में 42वें संविधान संशोधन से ‘शिक्षा’ को समवर्ती सूची में डालना संविधान निर्माताओं की मंशा का उल्लंघन है।

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