जरुरी जानकारी | तेल विपणन कंपनियों को अबतक 92.5 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति: इसमा

नयी दिल्ली, 29 जून चीनी मिलों ने नवंबर को समाप्त आपूर्ति वर्ष में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 170 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिये अनुबंध किया जो पिछले साल की तुलना में कम है। उद्योग के आंकड़े के अनुसार पेट्रोल में मिश्रण के लिये इसमें से अबतक 92.5 करोड़ लीटर की आपूर्ति की गयी है।

तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल में 5 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल के मिश्रण में कामयाब हुई हैं।

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इससे पूर्व एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-19 (दिसंबर-नवंबर) के दौरान 190 लीटर की आपूर्ति की गयी थी।

भारतीय चीनी मिलों के संघ (इसमा) ने एक बयान में कहा, ‘‘एथेनॉल विनिर्माताओं और ओएमसी के बीच मौजूदा एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2019-20 के लिये 170 करोड़ लीटर की आपूर्ति को लेकर अनुबंध हुआ है।’’

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संघ ने कहा कि एक दिसंबर 2019 से 22 जून 2020 के दौरान तेल विपणन कंपनियों को 92.5 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गयी। इससे पेट्रोल में अखिल भारतीय स्तर पर औसतन 5.09 प्रतिशत प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण हुआ है।

उत्तर प्रदेश, हरियाण, पंजाब, उत्तराखंड, बिहार और कर्नाटक समेत कुछ राज्यों में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण 8.5 से 9.8 प्रतिशत तक है।

इसमा ने कहा कि बी श्रेणी के शीरा और गन्ने के रस से तैयार 58 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति तेल विपणन कंपनियों को की गयी है।

अनुबंध के तहत 23 करोड़ लीटर एथेनॉल 30 नवंबर, 2020 तक आपूर्ति की जाएगी।

इसमा के अनुसार बी-शीरा और गन्ने के रस से चीनी के बजाए एथेनॉल तैयार होने से करीब 8 लाख टन चीनी उत्पादन पर असर पड़ा है।

संगठन के अनुसार इससे न केवल देश में अधिशेष चीनी कम होगी बल्कि चीनी मिलों के लिये उसी अनुपात में माल रखरखाव की लागत कम होगी।

इसमा ने कहा कि इससे मिलों को बेहतर रिटर्न भी मिलेगा क्योंकि सरकार द्वारा तय एथेनॉल का मूल्य चीनी की तुलना में ज्यादा लाभकारी है।

संगठन ने कहा कि इस विपणन वर्ष में एथेनॉल की आपूर्ति कम होने का कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत दक्षिण के कुछ राज्यों में सूखा पड़ना है। इससे गन्ने और चीनी के उत्पादन पर असर पड़ा है।

अच्छी बारिश और पानी की उपलब्धता से 2020-21 में गन्ने का रकबा सामान्य होने और गन्ने के उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।

इसीलिए सरकार ने 2020-21 में एथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति 300 से 350 करोड़ लीटर रहने का लक्ष्य रखा है। साथ ही पेट्रोल में 7.5 से 8 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का स्तर हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।

सरकार ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 के अनुसार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लिये 2022 तक 10 प्रतिशत और 2030 तक 20 प्रतिशत का लक्ष्य रखा है।

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