भुवनेश्वर, 27 फरवरी ओडिशा में तीन जिलों के तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों ने सामाजिक सुरक्षा सहित अपने छह सूत्री मांगों को पूरा करने को लेकर मंगलवार को यहां बड़ी संख्या में इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया।
ओडिशा राज्य मछुआरा संघ के बैनर तले मछुआरा समुदाय के सदस्यों ने डीजल पर सब्सिडी, समुद्र के मुहाने की नियमित खुदाई, औद्योगिक इकाइयों से रासायनिक अपशिष्टों को समुद्र में बहाने से रोकने, वन विभाग व तट रक्षक अधिकारियों के कथित दुर्व्यवहार को समाप्त करने और मछुआरा कल्याण कोष के गठन की मांग की।
भद्रक, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिलों के प्रदर्शनकारी मछुआरे नीली टोपी पहनकर हाथों में नीले झंडे लहराते हुए महात्मा गांधी मार्ग पर एकत्रित हुए और राज्य सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
ओडिशा राज्य मछुआरा महासंघ के अध्यक्ष श्रीकांत परिडा ने कहा, ''हमारा जीवन दयनीय हो चुका है क्योंकि हमें मछली पकड़ने वाली नौकाओं को चलाने के लिए 94 रुपये प्रति लीटर का डीजल खरीदना पड़ता है।''
उन्होंने कहा, '' नदियों और समुद्र में मछली पकड़ना हमारे जीवन का एकमात्र स्रोत है। दुर्भाग्य से, सरकार की उदासीनता के कारण हमें समुद्र छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा।''
डीजल पर सब्सिडी की मांग करते हुए प्रदर्शनकारी मछुआरों ने दावा किया कि कम से कम सात तटीय राज्य मछुआरों को डीजल पर सब्सिडी दे रहे हैं।
एक अन्य प्रदर्शनकारी मछुआरे ने कहा, ''ओडिशा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। हम सरकार को कई बार पत्र लिख चुके हैं लेकिन हमारी दुर्दशा की किसी को भी चिंता नहीं है। इसलिए हमें अपनी मांगों पर जोर देने के लिए भुवनेश्वर आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ''
प्रदर्शनकारी मछुआरों ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों के परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने की भी मांग की।
राज्य सरकार मछलियों को निर्बाध प्रजनन स्थल उपलब्ध कराने के लिए हर वर्ष तीन महीने 15 अप्रैल से 14 जून तक तट के पास मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाती है।
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