भुवनेश्वर, 25 मार्च ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने कांग्रेस के 12 विधायकों को सदन में ‘‘अनुशासनहीनता’’ के आरोप में मंगलवार को सात दिन के लिए निलंबित कर दिया।
कांग्रेस विधायकों के खिलाफ यह कार्रवाई सदन में सरकार के मुख्य सचेतक सरोज प्रधान द्वारा पेश प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद की गई।
निलंबित विधायकों में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता राम चंद्र कदम, सागर चरण दास, मंगू खिल्ला, सत्यजीत गोमांगो, अशोक कुमार दास, दशरथी गामांगो और सोफिया फिरदौस शामिल हैं।
हालांकि, दो अन्य कांग्रेसी विधायकों - ताराप्रसाद बहिनीपति और रमेश जेना को निलंबित नहीं किया गया क्योंकि घोषणा के समय वे सदन में मौजूद नहीं थे। बहिनीपति को इससे पहले 11 मार्च को इसी आधार पर सात कार्य दिवसों के लिए निलंबित किया गया था।
जैसे ही पाढ़ी ने यह फैसला सुनाया, कांग्रेस सदस्यों ने विरोध स्वरूप घंटा-घड़ियाल बजाते हुए विधानसभा में हंगामा शुरू कर दिया।
निलंबित विधायकों ने सदन में आसन के सामने प्रदर्शन किया और भजन गाए, जबकि पाढ़ी ने उनसे विधानसभा खाली करने और धरना बंद करने का आग्रह किया। ओडिशा की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने अध्यक्ष के कदम की निंदा की और इसे विधानसभा में विपक्ष की आवाज दबाने के लिए "प्रेरित" कदम बताया।
बहिनीपति ने कहा, ‘‘कांग्रेस विधायकों को हमें डराने के लिए निलंबित किया गया है। हम कार्रवाई से नहीं डरेंगे। हम लड़ेंगे और किसी भी तरह से समझौता नहीं करेंगे।’’
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी इस फैसले की आलोचना की और निलंबन आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।
दास ने कहा, ‘‘हमने महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए सदन की समिति के गठन की मांग की थी। और, उन्होंने कांग्रेस की आवाज दबाने का प्रयास किया। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
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