नयी दिल्ली, पांच अगस्त उच्चतम न्यायालय ने एक नन से बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलाक्कल की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज करते हुये इस मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया। इस बिशप पर नन ने बलात्कार का आरोप लगाया है।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।
मुलाक्कल ने इस याचिका में केरल उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें बलात्कार के इस मामले में आरोप मुक्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गयी थी।
उच्च न्यायालय ने जालंधर डायोसिस के अपदस्थ बिशप को बलात्कार के मामले में मुकदमे का सामना करने के लिये कहा था। बिशप के खिलाफ केरल में डायोसिस की नन ने जून, 2018 में शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि बिशप ने 2014 से 2016 के दौरान उसका यौन शोषण किया। नन की इसी शिकायत के अधार पर बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले की जांच करने वाले विशेष जांच दल ने बिशप को गिरफ्तार भी किया था। बिशप पर बलपूर्वक नन को रोकने, बलात्कार करने, अप्राकृतिक यौनाचार करने और धमकाने के आरोप लगाये गये थे।
उच्च न्यायालय ने बिशप की याचिका खारिज करते हुये अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया था कि मुलाक्कल के खिलाफ पहली नजर में बलात्कार का मामला बनता है।
अनूप
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