देश की खबरें | वृंदावन में यमुना में अपशिष्ट गिरने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए : एनजीटी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच अगस्त राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को कहा कि वृंदावन में यमुना के डूब क्षेत्र में अनियंत्रित तरीके से ठोस कचरा गिराए जाने से रोकने के लिये पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

अधिकरण ने कहा कि उत्तर प्रदेश के शहरी विकास विभाग की तरफ से दायर एक रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि एक सफाई निरीक्षक, कार्यकारी अधिकारी और शहरी स्थानीय निकाय के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, “अनुपालन के लगातार हो रहे गंभीर उल्लंघन को देखते हुए ऐसी कार्रवाई बमुश्किल पर्याप्त हो सकती है, जब उच्च प्राधिकारियों पर भी इन नियमों का पालन कराने की वैधानिक जवाबदेही हो।”

उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए अधिकरण ने कहा कि उचित कार्रवाई करने में नाकामी का नतीजा जुर्माना होगा।

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पीठ ने कहा, “यह साफ है कि अब तक उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं। समिति ने पाया कि जल में घुले खनिजों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को निकालने के लिये इंतजाम नहीं किये गए, नालियां जाम मिलीं, शोधन क्षमता दिन-प्रतिदिन के लिये ही पर्याप्त है और पूर्व में जमा अपशिष्टों के शोधन में सक्षम नहीं है।”

अधिकरण ने कहा कि जैविक कचरे के निस्तारण की समिति की अनुशंसा पर काम निश्चित रूप से शुरू होना चाहिए और ऐसा न होने पर जर्माना चुकाया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, “अनुशंसाओं को लागू करने में विफलता पर राज्य के खिलाफ पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को हुए नुकसान की भरपाई के लिये जुर्माना लगाया जाएगा जैसा कि समिति द्वारा सुझाया गया है।”

एनजीटी ने कहा कि समिति वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी जारी रख सकती है और आगे स्थिति रिपोर्ट दायर कर सकती है।

एनजीटी ने यह निर्देश संत मधुमंगल शुक्ला की तरफ से दायर याचिका पर दिये।

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