नयी दिल्ली, 10 अगस्त सरकार ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु में परिवर्तन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने 2010 में राज्यसभा में प्रस्तुत अपनी 39वीं रिपोर्ट में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु के बराबर करने की सिफारिश की थी। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष तक है।
मेघवाल ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु को बढ़ाकर 65 वर्ष तक करने के लिए 2010 में संविधान का 114वां संशोधन विधेयक पेश किया गया था। लेकिन संसद में इस पर विचार नहीं हो पाया और 15वीं लोकसभा के विघटन के साथ उस विधेयक की मियाद खत्म (लैप्स) हो गई।
उल्लेखनीय है कि विधि एवं कार्मिक संबंधी स्थायी समिति ने पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के कार्यकाल को वर्तमान सेवानिवृति की आयु से आगे बढ़ाने के लिए प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली की सिफारिश की।
वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष है जबकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के सेवानिवृति की आयु 62 वर्ष है।
समिति ने ‘‘न्यायिक प्रक्रिया और उनमें सुधार’’ विषय पर संसद में पेश रिपोर्ट में कहा कि वह महसूस करती है कि चिकित्सा विज्ञान की उन्नति और स्वास्थ्य की स्थिति, फैसलों की संख्या एवं गुणवत्ता के आधार पर न्यायाधीशों की सेवानिवृति की आयु बढ़ाये जाने पर विचार करने की जरूरत है।
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