नयी दिल्ली, 21 अगस्त अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों, नौकरशाहों और पूर्व सैनिकों सहित नागरिकों के एक समूह ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के गंभीर मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का कलकत्ता उच्च न्यायालय का आदेश दिखाता है कि राजनीतिक व्यवस्था का अपराधीकरण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
‘कॉल फॉर जस्टिस’ द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी राजनीतिक दल अपने संवैधानिक कर्तव्य के निर्वहन की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता है।
तथ्यान्वेषी रिपोर्ट में समूह ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा की घटनाओं की आलोचना करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय से मामले की जांच एसआईटी से कराने का अनुरोध किया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को हरा कर तृणमूल कांग्रेस ने लगातार तीसरी बार सरकार बनायी है।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता हिंसा कर रहे हैं, हालांकि सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों का खंडन किया है।
बयान में कहा गया है, ‘‘लोकतंत्र जांचा-परखा राजनीतिक तंत्र है और हर परिस्थिति में इसने खुद को साबित किया है। समय-समय पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव भागीदारी प्रक्रिया की परिपक्वता को दिखाता है।’’
उसमें कहा गया है, फैसला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि राजनीतिक व्यवस्था के अपराधीकरण को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कोई भी राजनीतिक दल अपने संवैधानिक कर्तव्य से भाग नहीं सकता।
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