देश की खबरें | जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं: त्रिवेंद्र सिंह रावत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों से आगे भी सावधानी बरतने की अपील की साथ ही कहा कि जब तक संक्रमण की दवा नहीं आ जाती तब तक ढिलाई बरतने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

देहरादून, 20 सितंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों से आगे भी सावधानी बरतने की अपील की साथ ही कहा कि जब तक संक्रमण की दवा नहीं आ जाती तब तक ढिलाई बरतने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।

रावत ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी करके कहा कि प्रायः देखा जा रहा है और भारत सरकार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों को स्वस्थ होने के पश्चात भी शरीर में दर्द, थकान, खांसी, गले में खराश व सांस लेने में दिक्कत जैसी तकलीफें हो रही हैं और इस स्थिति में उनका सावधानियां बरतना बहुत आवश्यक है ।

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मुख्यमंत्री ने ऐसी सावधानियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि कोविड-19 से ठीक हो चुके लोग भी पूर्ण रूप से बचाव के समस्त उपायों जैसे अनिवार्य रूप से फेस मास्क का इस्तेमाल करना, हाथों को नियमित तौर पर साबुन-पानी से अच्छे से धोना, सेनेटाइजर का इस्तेमाल, सामाजिक दूरी के नियम आदि का पालन करें।

उन्होंने कहा,‘‘ पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं, पौष्टिक भोजन खाएं, नित्य योग करें, प्राणायाम करें व ध्यान लगाएं, पर्याप्त मात्रा में नींद लें, आराम करें, धूम्रपान व मदिरापान से परहेज रखें।’’

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मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार नियमित रूप से दवा लें और यदि वह किसी और रोग से भी ग्रसित हैं तो उसका समुचित उपचार करें।

उन्होंने कहा कि अपने स्वास्थ्य का नियमित रूप से स्वयं निरीक्षण करें और तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा में गिरावट, छाती में दर्द, उलझन अथवा शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस करने जैसे खतरे के लक्षण अनुभव होने पर शीघ्र चिकित्सकीय सलाह लें।

रावत ने कहा कि कोविड-19 से ठीक होने के उपरांत अपने अच्छे अनुभव अपने मित्रों, रिश्तेदारों, समुदाय के लोगों से साझा करें ताकि समुदाय में रोग को लेकर भ्रांतियों को फैलने से रोका जा सके।

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