ताजा खबरें | 2019 से नहीं दिया गया पर्यावरण राहत कोष से कोई मुआवजा : सरकार

नयी दिल्ली, 11 अगस्त केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि खतरनाक पदार्थों से प्रभावित व्यक्तियों की सहायता के लिए 2008 में स्थापित पर्यावरण राहत कोष से 2019 के बाद से कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।

चौबे ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा को यह भी बताया कि 31 मार्च, 2023 तक पर्यावरण राहत कोष (ईआरएफ) में 1,062 करोड़ रुपये जमा हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘2019 के बाद से ईआरएफ से मुआवजे के रूप में कोई राशि वितरित नहीं की गई है।’’

भोपाल गैस त्रासदी के मद्देनजर सार्वजनिक दायित्व अधिनियम, 1991 (पीएलआईए) के तहत स्थापित, ईआरएफ का प्राथमिक उद्देश्य खतरनाक पदार्थों से संबंधित दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान करना है।

पीएलआईए खतरनाक सामग्रियों को संभालने वाले उद्योगों को अनिवार्य रूप से सार्वजनिक देयता बीमा प्राप्त करने का आदेश देता है। इसके तहत बीमा का विकल्प चुनने वाले खतरनाक उद्योगों की ओर से योगदान के अलावा, ईआरएफ में एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 24 के तहत पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा दिया गया मुआवजा शामिल है।

चौबे ने उच्च सदन को बताया कि ईआरएफ से मुआवजे के लिए आवेदन संबंधित कलेक्टर को प्रस्तुत किए जाते हैं।

जिलाधिकारी बाद में एक आदेश जारी कर कोष प्रबंधक, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को ईआरएफ से कलेक्टर के खाते में धनराशि स्थानांतरित करने का निर्देश देता है। इसके बाद जिलाधिकारी दावेदार को राशि वितरित करता है।

मंत्री ने कहा कि एनजीटी ने भी ईआरएफ से मुआवजा देने के लिए कोई विशेष निर्देश जारी नहीं किया है।

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