देश की खबरें | एनएमसी ने चिकित्सकों को मरीजों, उनके परिजन के हिंसा करने पर उपचार से इनकार करने की अनुमति दी

नयी दिल्ली, 10 अगस्त राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने अपने नये नियम के तहत चिकित्सकों को मरीजों या उनके रिश्तेदारों द्वारा दुर्व्यवहार या हिंसक व्यवहार करने की सूरत में इलाज से इनकार करने की अनुमति दे दी है, लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीज बिना इलाज के न रह जाए।

यह कदम चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एनएमसी का व्यावसायिक आचरण विनियम पंजीकृत चिकित्सकों (आरएमपी) को किसी भी दवा के ब्रांड या उपकरण को बढ़ावा देने या उनका विज्ञापन करने से रोकता है।

एनएमसी द्वारा दो अगस्त को गजट अधिसूचना में जारी नियमों के अनुसार, चिकित्सकों और उनके परिवार के सदस्यों को किसी भी तरह से फार्मा कंपनियों या उनके प्रतिनिधियों से कोई उपहार, यात्रा सुविधाएं, आतिथ्य, नकद समेत किसी भी तरह का लाभ नहीं लेना चाहिए।

नियम के मुताबिक, हालांकि, इसमें वेतन और ऐसे लाभ शामिल नहीं हैं, जो आरएमपी को इन संगठनों के कर्मचारियों के रूप में मिल सकते हैं।

इसके मुताबिक, आरएमपी को ऐसे तीसरे पक्ष के सेमिनार, कार्यशाला, संगोष्ठी, सम्मेलन जैसी किसी भी शैक्षिक गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए, जिसमें दवा कंपनियों या संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रायोजन शामिल हो।

नियम में कहा गया है, ‘‘यदि शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता है तो आरएमपी किसी मरीज का इलाज करने या उसका इलाज जारी रखने से इनकार कर सकता है। वहीं, यह बात सरकारी सेवा या आपातकालीन स्थिति वाले डॉक्टरों पर लागू नहीं होती है, लेकिन डॉक्टर को यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीज को बिना उपचार न छोड़ दिया जाए।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘अपमानजनक और हिंसक व्यवहार करने वाले रोगियों या उनके रिश्तेदारों के मामले में, आरएमपी इसकी रिपोर्ट कर सकता है और रोगी का इलाज करने से इनकार कर सकता है। ऐसे मरीजों को आगे के इलाज के लिए दूसरी जगह रेफर किया जाना चाहिए।’’

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