अमेरिका में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ 'नो किंग्स' आंदोलन
निर्वासन की कार्रवाई और ईरान के साथ जारी युद्ध के खिलाफ अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 'नो किंग्स' रैलियों का तीसरा दौर शुरू हो गया है.
निर्वासन की कार्रवाई और ईरान के साथ जारी युद्ध के खिलाफ अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 'नो किंग्स' रैलियों का तीसरा दौर शुरू हो गया है. लाखों लोग सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र और आजादी की मांग कर रहे हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शनों का सैलाब उमड़ पड़ा है. शनिवार को 'नो किंग्स' आंदोलन के तीसरे चरण के तहत अमेरिका के कई शहरों में लाखों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया. यह प्रदर्शन मुख्य रूप से सरकार की आक्रामक निर्वासन नीति, ईरान में जारी युद्ध और ट्रंप प्रशासन के अन्य विवादास्पद फैसलों के खिलाफ आयोजित किए गए.
आयोजकों के अनुसार, अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,200 से अधिक रैलियों की योजना बनाई गई थी. इस बार दो-तिहाई कार्यक्रम बड़े महानगरों के बाहर छोटे समुदायों और कस्बों में हुए. पहले आंदोलन की तुलना में छोटे शहरों की भागीदारी में 40 फीसदी का उछाल देखा गया है. न्यू यॉर्क, डलास, फिलाडेल्फिया और वॉशिंगटन जैसे बड़े शहरों में विशाल रैलियां आयोजित की गईं.
हालांकि व्हाइट हाउस ने इन रैलियों को सिरे से खारिज कर दिया है. प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को "वामपंथी फंडिंग नेटवर्क" की देन बताया और कहा कि इन्हें जनता का वास्तविक समर्थन हासिल नहीं है. रिपब्लिकन पार्टी की नेशनल कमेटी ने भी इन रैलियों की तीखी आलोचना की है.
मिनेसोटा और न्यू यॉर्क में विरोध की लहर
मिनेसोटा, जो डॉनल्ड ट्रंप की अवैध अप्रवास नीतियों के खिलाफ एक प्रमुख केंद्र बन गया है, वहां सेंट पॉल में राज्य की संसद के बाहर भारी भीड़ जुटी. लोग उन अमेरिकी नागरिकों की तस्वीरें थामे हुए थे जो इस साल संघीय आव्रजन अधिकारियों (आईसीई एजेंटों) की गोलीबारी में मारे गए थे. इस दौरान 2024 के डेमोक्रेटिक उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, "ट्रंप और उनकी नीतियों के खिलाफ आपका यह प्रतिरोध ही अमेरिका की अच्छाई का असली दिल और आत्मा है."
वहीं न्यू यॉर्क के मैनहैट्टन में हजारों की भीड़ को संबोधित करते हुए अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने कहा, "डॉनल्ड ट्रंप से पहले किसी भी राष्ट्रपति ने हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए ऐसा खतरा पैदा नहीं किया है."
डलास और लॉस एंजिलिस में झड़पें
डलास में आयोजित रैली के दौरान 'नो किंग्स' प्रदर्शनकारियों और धुर दक्षिणपंथी समूह प्राउड बॉयज के बीच हिंसक झड़पें हुईं. पुलिस ने सड़कों को बाधित करने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया. वहीं लॉस एंजिलिस में संघीय जेल के पास से हटने से इनकार करने पर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल किया.
यह आंदोलन केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप के बड़े शहरों में भी इसका असर देखा गया. जर्मनी में बर्लिन, हैम्बर्ग, म्यूनिख और फ्रैंकफर्ट जैसे शहरों में सैकड़ों लोग जमा हुए. बर्लिन में प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप की अलोकतांत्रिक प्रवृत्तियों के साथ-साथ एपस्टीन फाइल्स को पूरी तरह सार्वजनिक करने की मांग की.
इटली में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ भी नारे लगाए. लोग न्यायिक स्वतंत्रता और युद्ध मुक्त दुनिया की मांग कर रहे थे, जिसमें ईरान पर हालिया अमेरिकी-इस्राएली हमलों का विरोध भी शामिल था.
गिरती लोकप्रियता और आगामी चुनाव
रॉयटर्स के एक पोल के अनुसार, व्हाइट हाउस में वापसी के बाद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की लोकप्रियता गिरकर 36 फीसदी रह गई है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. आगामी नवंबर के मध्यावधि चुनाव को देखते हुए, आयोजकों का दावा है कि इडाहो, वायोमिंग और उटा जैसे रिपब्लिकन गढ़ों में भी लोग भारी संख्या में पंजीकरण करा रहे हैं.
'नो किंग्स' आंदोलन की शुरुआत पिछले साल 14 जून को डॉनल्ड ट्रंप के जन्मदिन पर हुई थी, जिसमें करीब 40 से 60 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था. अक्टूबर में हुए दूसरे आंदोलन में यह संख्या 70 लाख तक पहुंच गई थी. शनिवार का यह तीसरा दौर पिछले चार हफ्तों से ईरान युद्ध के अमेरिका में विरोध के तौर पर भी देखा जा रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 29, 2026 02:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

