नयी दिल्ली, 22 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि उसकी खंडपीठ अगले सप्ताह उस याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें यहां निजामुद्दीन मरकज के एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद सांस्थानिक प्रवास में रखे गये 916 विदेशियों को रिहा करने का अनुरोध किया गया है।
ये सब कोविड-19 संबंधी परीक्षण में संक्रमित नहीं पाये गए थे लेकिन इन्हें 30 मार्च से ही सांस्थानिक प्रवास में रखा गया है।
यह याचिका न्यायमूर्ति नवीन चावला के सामने सुनवाई के लिए आयी थी। न्यायमूर्ति चावला ने कहा कि रोस्टर के हिसाब से उसे 26 मई को एक खंडपीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए।
न्यायमूर्ति चावला ने कहा, ‘‘ मेरी राय में इस याचिका को रोस्टर के हिसाब से इस अदालत की खंडपीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए। उसे आपराधिक रिट याचिका के रूप में फिर नंबर दिया जाए। उसे 26 मई को खंडपीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाए लेकिन मुख्य न्यायाधीश का आदेश ही अंतिम रूप से मान्य होगा।’’
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि इस याचिका की एक प्रति दिल्ली सरकार के वकील को भी उपयुक्त निर्देश के लिए दी जाए।
वैसे शुरू में यह अर्जी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में दायर की गयी थी लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इसे आपराधिक रिट याचिका के रूप में लिया जाना चाहिए।
इस याचिका में दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के नौ मई के आदेश को चुनौती दी गयी जिसमें फिलहाल सांस्थानिक पृथक वास में रखे गये 567 विदेशी नागरिकों को जांच में इस वायरस से संक्रमित नहीं पाये जाने के बाद दिल्ली पुलिस की हिरासत में रखने का निर्देश दिया गया था।
मोहम्मद जमाल और अन्य याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह आदेश कानून के सामने समानता तथा जीवन एवं आजादी के अधिकार के विरूद्ध है।
916 विदेशियों में से 20 ने यह कहते हुए यह याचिका दायर की है कि निरंतर हिरासत आजादी के मूल ताने-बाने का उल्लंघन करती है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)













QuickLY