जरुरी जानकारी | नीति आयोग समिति की चीनी मिलों की अच्छी सेहत के लिये गन्ना मूल्य को चीनी दाम से जोड़ने की सिफारिश

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नयी दिल्ली, 20 अगस्त नीति आयोग के एक कार्यबल ने चीनी उद्योग की बेहतर वित्तीय सेहत के लिए गन्ने की कीमतों को चीनी के बाजार मूल्य से जोड़ने की सिफारिश की है।

कार्यबल ने चीनी मिलों को उत्पादन लागत को निकालने में मदद करने के लिए चीनी के न्यूनतम मूल्य को बढ़ाकर एकमुश्त 33 रुपये प्रति किलो करने की भी बात की है।

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नीति अयोग के सदस्य (कृषि) रमेश चंद की अध्यक्षता में 'गन्ना और चीनी उद्योग' पर पैनल की रिपोर्ट को मार्च 2020 में अंतिम रूप दिया गया था। इसे बृहस्पतिवार को इस सरकारी थिंक-टैंक के वेबसाइट पर डाला गया।

कार्यबल ने किसानों को उपयुक्त प्रोत्साहन प्रदान करके गन्ने की खेती के तहत आने वाले कुछ रकबों में कम पानी की आवश्यकता वाले फसलों की खेती को अपनाने की भी सिफारिश की है।

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रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘कार्य बल को लगता है कि गन्ना किसानों के बकाया राशि की समस्या को दूर करने और चीनी उद्योग को वित्तीय रूप से स्वस्थ बनाए रखने के लिए, गन्ने की कीमतों को निश्चित तौर पर चीनी के दाम से जोड़ा जाना चाहिए।’’

इसमें कहा गया है कि किसानों को उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) से कम मूल्य नहीं मिले, इस बात से किसानों को संरक्षित करने के लिए, मूल्य स्थिरीकरण कोष के साथ राजस्व साझेदारी फार्मूला (आरएसएफ) को सामने लाने की जरुरत है। हालांकि, रंगराजन समिति द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक फार्मूला पर विचार किया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में गन्ने से चीनी की प्राप्ति के स्तर में सुधार को ध्यान में रखते हुए, गन्ने की कीमतों को थोड़ा बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है।’’

कार्य बल ने चीनी के न्यूनतम मूल्य में एकमुश्त वृद्धि कर इसे 33 रुपये किलो करने की सिफारिश की है। कार्यबल का मानना है कि इससे चीनी मिलों को ब्याज एवं रखरखाव लागत सहित उत्पादन लागत वसूल करने में मदद मिलेगी।”

कार्यबल ने गन्ने की फसल वाले करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र को अन्य फसलों के इस्तेमाल की तरफ ले जाने पर जोर देते हुय कहा कि गन्ने के मुकाबले कम पानी खपत करने वाले वैकल्पिक फसलों की ओर रुख मोड़ने के लिए किसानों को 6,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया जा सकता है।

इसने कहा कि चीनी की कीमतों में ठहराव अथवा चीनी मिलों के सामने नकदी की समस्या मुख्य चिंता का कारण बना रहा है जिसके कारण सरकार को समय-समय पर विभिन्न नकदी समर्थन उपायों को करना पड़ता है।’’

कार्यबल ने कहा, ‘‘वह तीन साल की अवधि के लिए चीनी पर 50 रुपये प्रति क्विंटल का उपकर लगाने का प्रस्ताव करता है। पैनल ने कहा कि इस दौरान लगभग 4,500 करोड़ रुपये फंड में जुड़ेंगे जो कमी को पूरा करने में मदद करेंगा या चीनी मिलों को प्रौद्योगिकी उन्नयन करने और किसानों के बकाये का भुगतान करने के लिए आसान ब्याज दर पर ऋण प्रदान करने वाले बैंकों के लिए एक सहूलियत प्रदान करेंगे।

राजेश

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