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देश की खबरें | निठारी कांड: न्यायालय ने सुरेंद्र कोली को बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने 2006 के निठारी हत्याकांड मामले में आरोपी सुरेन्द्र कोली को बरी किये जाने के खिलाफ दायर 14 याचिकाओं को बुधवार को खारिज कर दिया।

देश की खबरें | निठारी कांड: न्यायालय ने सुरेंद्र कोली को बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं

नयी दिल्ली, 30 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने 2006 के निठारी हत्याकांड मामले में आरोपी सुरेन्द्र कोली को बरी किये जाने के खिलाफ दायर 14 याचिकाओं को बुधवार को खारिज कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि कोली को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निष्कर्षों में "कोई खामी" नहीं थी।

साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 का हवाला देते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि खुले नाले से पीड़ितों की खोपड़ियां और अन्य सामान बरामद करना पुलिस के समक्ष कोली के बयान के बाद नहीं किया गया था।

पीठ ने कहा कि पुलिस द्वारा आरोपी का बयान दर्ज किए बिना की गई कोई भी बरामदगी साक्ष्य कानून के तहत सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

न्यायालय ने कहा कि केवल उन बरामदगी को ही साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, जो केवल आरोपियों की पहुंच वाले स्थान से की गई हों, तथा जो मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामले में साक्ष्य के रूप में स्वीकार की जा सकती हैं।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर याचिकाओं सहित अलग-अलग याचिकाओं पर विचार करने को लेकर सहमति व्यक्त की थी, जिसमें 16 अक्टूबर, 2023 को कोली को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी।

इनमें से एक याचिका एक पीड़ित के पिता ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी।

मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक कोली पर उत्तर प्रदेश के निठारी में अपने पड़ोस के लोगों, खासकर बच्चों, के साथ बलात्कार और हत्या का आरोप था।

कोली को 28 सितंबर, 2010 को निचली अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने पंढेर और कोली को मौत की सज़ा के मामले में यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके अपराध को ‘‘संदेह से परे" साबित करने में विफल रहा और इसे एक "विफल" जांच बताया।

कोली को 12 मामलों में और पंढेर को दो मामलों में दी गई मौत की सजा को पलटते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि जांच "जिम्मेदार एजेंसियों द्वारा जनता के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।"

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 30, 2025 05:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).