नयी दिल्ली, छह जुलाई न्यू इंडिया फाउंडेशन (एनआईएफ) ने स्वतंत्रता के बाद के भारत पर गैर-काल्पनिक पुस्तकें लिखने के लिए बृहस्पतिवार को सात लेखकों और विद्वानों को अपनी प्रतिष्ठित पुस्तक फेलोशिप देने की घोषणा की।
फेलोशिप का यह 11वां संस्करण है और इसके तहत प्रत्येक प्राप्तकर्ता को एक वर्ष की अवधि के लिए 18-18 लाख रुपये दिए जाते हैं।
वित्तीय सहायता के अलावा, फाउंडेशन फेलोशिप के दौरान प्रस्ताव से लेकर प्रकाशन तक संपादकीय, कानूनी और प्रशासनिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
सात पुरस्कार विजेताओं में शिक्षाविद, लेखक, पत्रकार और बुद्धिजीवी शामिल हैं। इनमें प्रमित भट्टाचार्य ("अकाउंटिंग फॉर द नेशन: द स्टोरी बिहाइंड इंडियाज ग्रोथ नंबर्स"), सृजन देशपांडे ("द लाइफ एंड म्यूजिक ऑफ कुमार गंधर्व"), सैयद जलील हुसैन ("एम्बिवलेंट एलीगियंसेस: शियाइज्म एंड एवरीडे पॉलिटिक्स इन कश्मीर"), रचना मेहरा ("प्लानिंग न्यू टाउंस इन द पोस्ट-इंडिपेंडेंस इरा: द मेकिंग ऑफ फरीदाबाद सिटी (1948-90)"), माया मीरचंदानी ("फादर्स, संस, एंड ए ट्रबल्ड पैराडाइज़: ए हिस्ट्री ऑफ़ द अब्दुल्लाज़") के नाम हैं।
इस सूची में दिशा मलिक ("लव, डेथ एंड कंप्रोमाइज: स्टोरीज ऑफ ए न्यू रुरल पब्लिक - ए कलेक्टिव बायोग्राफी ऑफ खबर लहरिया) और रामकृष्ण रामास्वामी ("ए डिफिकल्ट माइंड: एन इंटेलेक्चुअल बायोग्राफी ऑफ दामोदर धर्मानंद कोसंबी") भी शामिल हैं।
पुरस्कार विजेताओं की सूची एमेरिटस ट्रस्टी नंदन नीलेकणि, कमलादेवी चट्टोपाध्याय एनआईएफ बुक प्राइज अध्यक्ष नीरजा गोपाल जयाल, बुक फेलोशिप अध्यक्ष श्रीनाथ राघवन और प्रबंधन ट्रस्टी मनीष सभरवाल द्वारा तैयार की गई।
एनआईएफ बुक फेलोशिप के तहत हाल में प्रकाशित पुस्तकों में अभिषेक चौधरी की "वाजपेयी: द एसेंट ऑफ द हिंदू राइट", मनोज मित्ता की "कास्ट प्राइड: बैटल्स फॉर इक्वेलिटी इन हिंदू इंडिया" और सवित्री प्रीता नायर की "क्रोमोसोम वुमन, नोमैड साइंटिस्ट: ईके जानकी अम्मल, ए लाइफ 1897-1984" शामिल हैं।
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