देश की खबरें | बेंगलुरु हिंसा के दो मामलों की जांच एनआईए ने संभाली
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

बेंगलुरु/नयी दिल्ली, 22 सितम्बर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कांग्रेस विधायक के रिश्तेदार द्वारा कथित अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट पर 11 अगस्त की रात शहर में भड़की हिंसा से संबंधित दो मामलों की जांच का जिम्मा औपचारिक रूप से संभाल लिया है।

एनआईए के अनुसार महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक टीम उन मामलों की जांच के लिए बेंगलुरू पहुंची है, जिसमें राज्य पुलिस द्वारा गैर कानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम के प्रावधान लगाए गए थे।

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अधिकारियों ने मंगलवार को नयी दिल्ली में बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने दो अलग एफआईआर दर्ज कर मामलों की जांच शुरू की है। पहले इन मामलों की जांच बेंगलुरु पुलिस द्वारा की जा रही थी।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन मामलों की जांच एनआईए को सौंपी है।

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एनआईए ने कहा, ‘‘ एनआईए अधिनियम 2008 की धारा 6 (4) और 8 के तहत गृह मंत्रालय के आदेश के अनुपालन में, एनआईए ने आगजनी और हिंसा के दो मामलों की जांच शुरू की है, जहां राज्य पुलिस द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम लागू किया गया था।’’

यह दोनों मामले डीजे हल्ली और कदुगोंदानाहल्ली पुलिस थाने में दर्ज किए गए हैं।

एनआईए के एक प्रवक्ता ने दिल्ली में कहा, “11 अगस्त 2020 को हुई घटना की संक्षिप्त पृष्ठभूमि यह है कि रात करीब आठ बजे 1000 से ज्यादा लोग बेंगलुरु शहर के कवलबाइरासंद्रा में कांग्रेसी विधायक (पुलकेशी नगर सीट) अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर के बाहर जुट गए थे। यह भीड़ विधायक के एक रिश्तेदार नवीन द्वारा सोशल मीडिया (फेसबुक) पर की गई उस आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध कर रही थी, जिसमें कथित रूप से मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं का अपमान किया गया था।”

प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा आरोप है कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के प्रदेश सचिव मुजम्मिल पाशा ने पूर्व में एक बैठक बुलाई और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और एसडीपीआई के सदस्यों को निर्देश दिया कि वे भीड़ को उकसाएं और हिंसा करें।

अधिकारी ने कहा कि इसके बाद उग्र भीड़ ने डीजे हल्ली, केजी हल्ली और पुलाकेशी नगर इलाकों में तोड़फोड़ की थी। भीड़ ने डीजे हल्ली पुलिस थाने और केजी हल्ली पुलिस थाने पर हमला किया और तोड़फोड़ की।

इस दौरान चार लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से तीन पुलिस की गोलीबारी में मारे गए थे।

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