देश की खबरें | एनजीटी ने कोटद्वार में कचरा निपटान मामले में उत्तराखंड सरकार की खिंचाई की
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नयी दिल्ली, 29 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कोटद्वार जिले में खोह नदी के किनारे कचरा निपटान के मामले में बुधवार को उत्तराखंड सरकार की खिंचाई की।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने उल्लेख किया कि उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रस्तुत एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ अंतरिम कदम उठाए गए हैं और आगे का काम प्रगति पर है।
पीठ ने कहा, ‘‘हमें सांवधिक नियमों के तहत तय की गई समयसीमा के संदर्भ में कोई पर्याप्त प्रगति दिखाई नहीं देती। पर्यावरण को लगातार नुकसान हो रहा है जो एक आपराधिक दोष है।’’
अधिकरण ने कहा कि मानव जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को संभावित खतरे के परिप्रेक्ष्य में कदम उठाने के लिए राज्य का दायित्व किसी भी तरह कानून व्यवस्था से अलग नहीं है।
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पीठ ने कहा, ‘‘स्पष्ट किया जाता है कि यदि कोई प्रगति नहीं होती है तो राज्य को निष्क्रियता के एवज में क्षतिपूर्ति करनी पड़ सकती है, और साथ में विफलता के दोषी अधिकारियों पर अभियोग भी चल सकता है।’’
एनजीटी ने कहा कि अगले साल 11 जनवरी से पहले मामले में आगे की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
अधिकरण उत्तराखंड निवासी अरविन्द बनियाल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें रतनपुर, काशीरामपुर, गाडीघाट में खोह नदी के किनारे और खेल स्टेडियम, कोटद्वार के पास अवैध रूप से स्थापित कचरा निपटान डंप यार्डों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया गया है जहां कचरा जलाया जा रहा है और नदी प्रदूषित हो रही है।
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