नयी दिल्ली, 10 जुलाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन के दौरान प्रतिबंध के बावजूद राज्य में ईंट भट्टों को संचालित करने की अनुमति देने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की खिचाई की है।
एनजीटी ने कहा कि वह इस बात से चकित है कि मुख्य सचिव इस अधिकरण के आदेश का उल्लंघन करते हुए कैसे विरोधाभासी आदेश पारित कर सकते हैं। ऐसा करना आपराधिक कृत्य के समान है।
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एनजीटी ने कहा कि वायु प्रदूषण होने संबंधी विशेषज्ञ रिपोर्ट के अलावा उसने पिछले साल 15 नवंबर को ईंट भट्टों के संचालन के खिलाफ एक आदेश भी पारित किया था।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को दिए अपने आदेश में कहा कि इस तरह की कार्रवाई कानून का उल्लंघन है। अधिकरण ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को सावधान रहने के लिए आगाह किया और कहा कि इस अधिकरण के आदेश का उल्लंघन करने पर अभियोजन, वेतन रोकना या अन्य कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया जा सकता है।
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एनजीटी ने मुख्य सचिव को अधिकरण के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही पीठ ने मुख्य सचिव के आदेश को इस अधिकरण के आदेश का उल्लंघन करार देते हुए रद्द कर दिया।
एनजीटी का यह आदेश तब आया जब गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने पीठ से कहा कि मार्च में लॉकडाउन के कारण ईंट भट्टों पर निरीक्षण नहीं किया जा सका।
उन्होंने पीठ को बताया कि लॉकडाउन अवधि के दौरान, मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य में ईंट भट्टों को संचालित करने की अनुमति दें।
उन्होंने कहा कि कई ईंट भट्टे लॉकडाउन के दौरान बंद हो गए थे क्योंकि अधिकतर मजदूर अपने-अपने घर वापस चले गए थे। लेकिन मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुपालन में लॉकडाउन के दौरान कुछ ईंट भट्टे चल रहे थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण ईंट भट्टों को सत्यापित नहीं किया जा सका।
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