नयी दिल्ली, 17 अगस्त राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में ईंट भट्ठा संचालन में पर्यावरण मानदंडों के गंभीर उल्लंघन का संज्ञान लेते हुए ऐसी इकाइयों को बंद करने का आदेश दिया है जो कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना संचालित हो रही हैं।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) को जिला मजिस्ट्रेट और पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता वाली वायु गुणवत्ता निगरानी समिति के साथ समन्वय में उचित स्थानों पर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की स्थापना सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहे ईंट भट्टों को राज्य पीसीबी द्वारा वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए तुरंत बंद किया जाना चाहिए।’’
अधिकरण ने कहा कि वैधानिक नियामक प्राधिकारियों ने कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की है।
एनजीटी ने यह भी निर्देश दिया कि एसपीसीबी द्वारा सभी ईंट भट्टों को दी गई सहमति की केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देशों के साथ-साथ वायु गुणवत्ता मानदंडों, निर्धारित मानदंड और वहन क्षमता के आलोक में समीक्षा की जाए।
अधिकरण ने कहा कि प्रदूषण भार को कम करने के हित में पीएनजी के साथ सुरंग भट्ठा प्रौद्योगिकी को उचित रूप से प्रोत्साहित किया जा सकता है।
एनजीटी ने ईंट भट्टों की संख्या के संदर्भ में क्षेत्र की वहन क्षमता का और अध्ययन करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसे सही मापदंडों को लागू करके और वायु गुणवत्ता के प्रासंगिक डेटा के आधार पर बनाए रखा जा सकता है।
समिति में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल शर्मा, सीपीसीबी के प्रतिनिधि जो अतिरिक्त निदेशक से कम स्तर के नहीं होंगे, पूर्व प्रोफेसर आईआईटी दिल्ली प्रोफेसर मुकेश खरे, राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के सदस्य सचिव और उत्तर प्रदेश राज्य पीसीबी के मुख्य अभियंता पर्यावरण इसके सदस्य होंगे।
अधिकरण ने कहा कि समिति स्थिति का जायजा लेने के लिए 15 दिनों के भीतर स्थल का दौरा कर सकती है और हितधारकों के साथ बातचीत कर सकती है और उसके बाद, हवा की गुणवत्ता और ईंट भट्टों के स्थान के उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन कर सकती है।
अधिकरण मथुरा निवासी मुकेश कुमार अग्रवाल द्वारा मथुरा जिले, विशेष रूप से मांट और छाता क्षेत्रों में ईंट भट्टों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
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