देश की खबरें | एनजीटी ने दिल्ली, हरियाणा को नजफगढ़ झील के लिए पर्यावरण योजना तैयार करने का निर्देश दिया
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नयी दिल्ली, 18 सितम्बर दिल्ली और हरियाणा के गुरूग्राम- दोनों में पड़ने वाली नजफगढ़ झील को एक जलाशय घोषित करने को लेकर विवाद पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने शुक्रवार को दोनों सरकारों को निर्देश दिया कि वे इलाके में अतिक्रमण और निर्माण कार्य रोकने के लिए एक पर्यावरण योजना तैयार करें।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल के नेतृत्व वाली एक पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से कहा कि वह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सहायता से एक पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार करने की कार्यवाही आगे बढ़ाये।
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पीठ ने कहा, ‘‘सीपीसीबी एक नोडल एजेंसी के तौर पर समन्वय कर सकता है। ऐसी योजना तीन महीने में तैयार की जा सकती है। कार्रवाई रिपोर्ट अगली तारीख से पहले ईमेल के जरिये दायर की जा सकती है।’’
मामले की अगली सुनवायी की तिथि 27 जनवरी 2021 तय की गई।
अधिकरण ने कहा कि गुरूग्राम के जिला मजिस्ट्रेट से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में जलाशय की कोई प्रविष्टि नहीं है और यह क्षेत्र आंशिक रूप से सरकारी और आंशिक रूप से निजी है।
हरियाणा के वकील ने हालांकि कहा कि एक बड़ा जलाशय अस्तित्व में है और एक प्रबंधन योजना राज्य के विचाराधीन है।
एनजीटी ने कहा, ‘‘इस तथ्य के मद्देनजर कि एक बड़ा जलाशय है जो आंशिक रूप से दिल्ली में और आंशिक रूप से हरियाणा में आता है, उचित होगा कि एक पर्यावरण प्रबंधन योजना हरियाणा राज्य और दिल्ली एनसीटी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की जाए।’’
यह आदेश एक गैर सरकारी संगठन ‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज की एक याचिका पर आया जिसमें मुद्दे पर फैसले के लिए एनजीटी के 2017 के आदेश को जल्द से जल्द लागू करने का अनुरोध किया गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली एनसीटी और हरियाणा आवश्यक कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।
इसमें दावा किया गया कि भले ही हरियाणा सरकार को झील को जलाशय घोषित करने का एनजीटी को आश्वासन दिए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अतिक्रमणों और निर्माणों को रोकने के लिए आगे कदम नहीं उठाए गए हैं।
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