देश की खबरें | नवजात शिशुओं में बिलीरुबिन के स्तर का पता लगाने के लिए नयी तकनीक ईजाद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस), कोलकाता के वैज्ञानिकों ने नवजात शिशुओं में पीलिया के लक्षणों को लेकर बिलीरुबिन के स्तर का पता लगाने के लिए एक नयी तकनीक ईजाद की है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 जुलाई एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस), कोलकाता के वैज्ञानिकों ने नवजात शिशुओं में पीलिया के लक्षणों को लेकर बिलीरुबिन के स्तर का पता लगाने के लिए एक नयी तकनीक ईजाद की है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वायत्त अनुसंधान संस्थान एसएनबीएनसीबीएस में प्रोफेसर समीर के. पाल और उनके समूह ने ‘एजेओ नियो’ नामक उपकरण में स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया है ।

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‘अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स’ (2004) के मुताबिक नवजात बच्चों में बिलीरुबिन के स्तर का पता सावधानीपूर्वक लगाना जरूरी है । बच्चे के खून में बिलीरुबिन के उच्च स्तर के कारण मस्तिष्क को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

एसएनबीएनसीबीएस नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के साथ भागीदारी कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तपोषित टेक्निकल रिसर्च सेंटर की मकजबानी कर रहा है।

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एनआरस मेडिकल कॉलेज में एसएनबीएनसीबीएस टीम के अध्ययन के मुताबिक विकसित उपकरण ‘एजेओ नीओ’ बिलीरुबिन का स्तर पता लगाने में असरदार है। इस उपकरण के जरिए डॉक्टरों को तुरंत ही (10 सेकंड में) रिपोर्ट मिल जाती है।

खून से परीक्षण की पारंपरिक पद्धति की तुलना में यह आसान और सुविधाजनक भी है ।

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