जरुरी जानकारी | नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जवाबदेही बढेगी, रोजगार की स्थित में सुधार होगा: उद्योग जगत
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नयी दिल्ली, 29 जुलाई उद्योग जगत के शीर्ष कार्यकारियों का कहना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी प्राप्त नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति से कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, शिक्षा को बेहतर बनाने के लिये ठोस डिजिटल संरचना तैयार होगी और जवावदेही व रोजगार प्राप्ति में सुधार होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी। इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों के लिये एकल नियामक, डिग्री पाठ्यक्रमों में बीच में शामिल होने व छोड़ने का विकल्प, एमफिल को समाप्त करने आदि समेत कई सुधार किये गये हैं। इससे पहले 1986 में बनी शिक्षा नीति में आखिरी बार 1992 में संशोधन किया गया था।
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एनआईआईटी लिमिटेड के चेयरमैन एवं सह-संस्थापक तथा एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक राजेंद्र एस पवार ने कहा, ‘‘भारत की बहुप्रतीक्षित नयी शिक्षा नीति (एनईपी), दिशात्मक परिवर्तन और क्षेत्रीय सुधारों की एक अग्रदूत है। इससे 21वीं सदी में भारत के शिक्षा क्षेत्र में नये आयामों के खुलने की उम्मीद है।’’
उन्होंने कहा कि शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह प्रतिशत खर्च करने का इरादा निर्णायक बदलाव लायेगा।
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टीमलीज सर्विसेज की वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीति शर्मा ने कहा कि यह भारत में सीखने को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह पारिस्थितिकी तंत्र में समग्र जवाबदेही में सुधार करेगा।
अपग्रैड के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं सह-संस्थापक मयंक कुमार ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि यह ऑनलाइन शिक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जैसा कि अभी 'शिक्षा' और 'ऑनलाइन शिक्षा' समानार्थी हो गये हैं।’’
स्किल मॉन्क्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रामेश्वर मंडली ने कहा कि नयी नीति वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने के भारत के दृष्टिकोण को एक गति प्रदान करेगी।
एजुकेशनल इनिशिएटिव्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी श्रीधर राजगोपालन ने कहा कि कम से कम 5 वीं कक्षा तक मातृ या स्थानीय में शिक्षा प्रदान करने के दृष्टिकोण के बहुत सारे लाभ हैं। उन्होंने कहा, "शैक्षणिक अनुसंधान ने यह स्थापित किया है कि बच्चे प्राथमिक कक्षाओं में अपनी मातृ (या स्थानीय ) में सीखते हैं तो सबसे अच्छा सीखते हैं।"
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