विदेश की खबरें | सुरक्षा परिषद सुधार पर वार्ता बिना किसी प्रगति के अगले 75 साल तक जारी रह सकती है:भारत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के, सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता को अगले यूएनजीए सत्र में आगे बढ़ाने के निर्णय की आलोचना की है।
संयुक्त राष्ट्र,13 जुलाई भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के, सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता को अगले यूएनजीए सत्र में आगे बढ़ाने के निर्णय की आलोचना की है।
इस 193 सदस्यीय महासभा ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 77वें सत्र के लिए अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार पर एक मौखिक मसौदा पारित किया था। 77वां सत्र इस साल सितंबर में शुरू होगा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रभारी आर. रवींद्र ने कहा कि भारत अपने रुख पर कायम है कि आईजीएन को आगे बढ़ाने का फैसला केवल तकनीकी कवायद तक सिमट कर ना रह जाए।
उन्होंने कहा कि वे आईजीएन को आगे बढ़ाने की इस तकनीकी कवायद को एक और अवसर गंवाने की तरह देखते हैं, जिसमें पिछले चार दशक में कोई प्रगति नहीं हुई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब यह स्पष्ट है कि अपने ‘‘वर्तमान स्वरूप और तौर-तरीकों में...अर्थात, ‘जीए रूल्स ऑफ प्रोसीज़र’ को लागू किए बिना, कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड के बिना और इस संदर्भ में लिखित में कुछ भी उपलब्ध होने तक.. अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) वास्तविक सुधार की दिशा में किसी भी तरह की प्रगति के बिना और 75 साल तक जारी रह सकती है। ’’
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र का एक जिम्मेदार सदस्य होने के नाते, ‘‘ हम सुधारों का समर्थन करने वाले हमारे साझेदारों के साथ इस प्रक्रिया में शामिल होते रहेंगे और भाषणों की बजाय इसे लिखित वार्ता में तब्दील करने के प्रयासों पर जोर देते रहेंगे।’’
भारत ने कहा कि ‘‘ हममें से जो वास्तव में हमारे नेताओं की सुरक्षा परिषद सुधारों की शीघ्र एवं व्यापक प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहते हैं, उनके लिए आईजीएन से परे देखना ही अब एकमात्र व्यवहार्य रास्ता हो सकता है।’’
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने बैठक में कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार ‘‘जरूरी हैं और इसमें पहले ही काफी देर हो चुकी है।’’
वहीं, चीन, पाकिस्तान, इटली और दक्षिण कोरिया ने अपने बयानों में शाहिद के भेजे पत्र और ‘‘लिखित वार्ता’’ पर उनके संदर्भ का भी जिक्र किया था।
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