जरुरी जानकारी | निर्यात प्रोत्साहन योजना एमईआईएस से जुड़े मुद्दे को सुलझाने पर बातचीत जारी: गोयल

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नयी दिल्ली, 30 जुलाई केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बृस्पतिवार को कहा कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय सरकार के वित्त पर ‘गंभीर’ असर डाले बिना निर्यात प्रोत्साहन योजना एमईआईएस के मसले के समाधान की कोशिश कर रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय ने भारत से वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) के तहत निर्यातकों के लिये कर प्रोत्साहन प्राप्त करने को लेकर आवेदन देने की ऑनलाइन प्रणाली को 23 जुलाई से अवरूद्ध कर दिया है। इसका कारण राजस्व विभाग द्वारा अप्रैल-दिसंबर, 2020 के दौरान योजना के तहत लाभ को 9,000 करोड़ रुपये तक सीमित रखने का फैसला करना है।

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उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित वेबिनार (इंटरनेट के जरिये आयोजित सेमिनार) में गोयल ने कहा, ‘‘मेरे पास एमईआईएस का कोई एकदम से समाधान नहीं है। लेकिन हम संबद्ध प्राधिकरणों से बातचीत कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि एमईआईएस खत्म हो रहा है, यह नकद प्रवाह का मामला है और हम सभी जानते हैं कि कोविड-19 का सरकार के राजस्व पर भी उल्लेखनीय असर पड़ा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं आपको आóश्वस्त करता हूं कि हम इस मसले को देख रहे हैं। हम बातचीत कर रहे हैं और हम इसके जल्द समाधान की कोशिश कर रहे हैं, जो दोनों पक्षों के लिये लाभदायक होगा। इसीलिए सरकार के वित्त पर गंभीर असर डाले बिना, हम समाधान निकालने की कोशिश करेंगे जिससे हमारे निर्यातकों को भी लाभ हो सके।’’

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राजस्व विभाग ने वाणिज्य मंत्रालय से निर्यात प्रोत्साहन योजना एमईआईएस की समीक्षा करने को कहा है ताकि चालू वित्त वर्ष में इस कार्यक्रम के तहत राजकोषीय प्रोत्साहन को कम कर 9,000 करोड़ रुपये के स्तर पर रखा जा सके। राजस्व विभाग का कहना है कि इस योजना का इच्छित परिणाम नहीं निकला है।

उसने वाणिज्य विभाग से यह भी आग्रह किया कि एमईआईएस प्रोत्साहन को लक्षित किया जाना चाहिए ताकि इससे निर्यात को प्रोत्साहन मिले, ऐसे प्रोत्साहन नहीं होने चाहिये जिनका वांछित नतीजा नहीं आये।

एमईआईएस के तहत सरकार शुल्क लाभ देती है जो उत्पाद और देश पर निर्भर करता है।

एमईआईएस योजना अप्रैल 2015 में पेश की गयी। यह 31 दिसंबर 2020 को समाप्त होगी। इसके स्थान पर सरकार पहले ही नई योजना निर्यात वस्तुओं पर शुल्क या कर से छूट (आरओडीटीईपी) की घोषणा कर चुकी है।

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