नयी दिल्ली, 13 जुलाई भारत ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों का पता लगाने और उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेजी से शुरू करने पर जोर देते हुए बुधवार को कहा कि ऐसे अपराधियों की विदेशों में स्थित संपत्तियों को कुर्क करने के लिए उसे देश के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
ब्रिक्स देशों की भ्रष्टाचार निरोधक मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए भारत के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह बात कही।
उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों की राष्ट्रीय एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान को बढ़ाकर धनशोधन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) पांच देशों का एक संगठन है।
उन्होंने विदेशों में भ्रष्टाचार की आय के हस्तांतरण को रोकने के लिए प्रयास करने तथा वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के धनशोधन विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण संबंधी मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने का भी आह्वान किया।
जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘इसे लेकर किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर धनशोधन, बैंकिंग धोखाधड़ी और कर चोरी जैसे आर्थिक अपराधों का बेहद गंभीर प्रभाव पड़ता है।’’
जितेंद्र सिंह ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को लेकर भविष्य की कार्रवाई योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे भगोड़े आर्थिक अपराधियों का पता लगाया जा सकता है और तेजी से उनका प्रत्यर्पण किया जा सकता है। इसके अलावा विदेशों में स्थित उनकी संपत्ति को देश के कानून की पहुंच के भीतर लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत भ्रष्टाचार और बेहिसाब धन के खिलाफ अपने अभियान को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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