जरुरी जानकारी | ‘किसान का मतलब गरीब होना’ की धारणा से छुटकारा पाने की जरुरत: केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी

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नयी दिल्ली, 23 दिसंबर केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘किसान का मतलब गरीब होना’ की धारणा से छुटकारा पाने की आवश्यकता है क्योंकि इस तरह की ‘गलतफहमी’ युवाओं को कृषि को पेशे के रूप में अपनाने से हतोत्साहित कर रही है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘रूरल वॉयस’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, कृषि राज्य मंत्री ने युवाओं की खेती की गतिविधियों में रुचि नहीं लेने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस स्थिति के लिए अन्य बातों के अलावा किताबों और मीडिया में बनी ‘किसान गरीब है’ की गलत धारणा को जिम्मेदार बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘किसान का मतलब गरीब होना है, इस धारणा से छुटकारा पाने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा कि जब भी गांवों या अन्य जगहों पर किसानों पर चर्चा होती है, तो आम धारणा है कि 'किसान गरीब होना चाहिए'।

यहां तक ​​कि किसानों पर किसी भी कहानी (साहित्यिक कार्य) में, यह हमेशा 'इस गांव में रहने वाले एक गरीब किसान' से शुरू होता है, उन्होंने कहा कि 'गरीब' शब्द हमेशा किसानों से जुड़ा होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘नतीजतन, सभी ने सोचना शुरू कर दिया है कि किसान गरीब होंगे। जब भी मैं किसी पत्रिका में किसी किसान की तस्वीर देखता हूं, तो एक किसान को फटे कपड़ों के साथ एक सूखी जमीन में बैठे आकाश की ओर देखते हुए दिखाया जाता है।’’

उन्होंने कहा कि एक किसान के इस तरह के वर्णन ने उन युवाओं के मन में ‘गलतफहमी’ पैदा कर दी है जो खेती को एक पेशे के रूप में नहीं अपनाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि युवा सोचते हैं कि अगर वे कृषि में आ गए तो उनकी स्थिति वैसी ही होगी जैसी किताबों और मीडिया में किसानों को लेकर वर्णित है।

कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जिक्र करते हुए, मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को हकीकत रूप देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बेहतर आय प्राप्त करने के लिए फसल विविधीकरण और उच्च मूल्य देने वाली फसलों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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