जरुरी जानकारी | निर्माण क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए व्यवहारिक तरीके खोजने की जरूरत: पुरी

नयी दिल्ली, 25 अगस्त आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण 2030 तक 60 करोड़ से अधिक लोगों के शहरों में निवास करने का अनुमान है। उन्होंने निर्माण उद्योग में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की जरूरत पर भी बल दिया।

मंत्री ने जमीन-जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों के शीर्ष संगठन क्रेडाई (कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) द्वारा 'निर्माण उद्योग में नई और उभरती भवन निर्माण सामग्री और प्रौद्योगिकियों को अपनाने' के विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। क्रेडाई 13,000 से अधिक डेवलपर सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है।

पुरी ने कहा, "यह जरूरी है कि हम निर्माण उद्योग में उभरती सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए व्यवहार्य तरीके खोजें।"

इस संबंध में सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में पुरी ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने निर्माण उद्योग में इन पुरानी प्रौद्योगिकियों की जगह नई अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया था।

मंत्रालय ने अपनी ओर से ‘ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज’ के तहत दुनिया भर से 54 नवीन निर्माण प्रौद्योगिकियों को चुना है। चेन्नई, राजकोट, इंदौर, लखनऊ, रांची और अगरतला में छह लाइट हाउस परियोजनाओं का चयन किया गया है, जिसके तहत नवीन निर्माण प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके 6,368 घर बनाए जा रहे हैं।

पुरी ने कहा, "इन लाइट हाउस परियोजनाओं के साथ, मेरा मानना है कि मोदी सरकार ने निर्माण उद्योग को खुद को फिर से खड़ा करने के लिए और 2030 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने में प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए रूपरेखा तैयार किया है।"

उन्होंने इन छह परियोजनाओं में नई प्रौद्योगिकियों के उपयोग के विभिन्न लाभों का हवाला दिया। इनसे निर्माण समय में 50 प्रतिशत की कमी, सीमेंट की 15-20 प्रतिशत की बचत, निर्माण अपशिष्ट में 20 प्रतिशत की कमी, लागत में 10-20 प्रतिशत की कमी, 20-25 प्रतिशत बढ़ी हुई तापीय सुविधा, 4-सितारा ग्रीन हाउस रेटिंग, ऊर्जा में 20 प्रतिशत की कमी और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 35 प्रतिशत की कमी आदि हैं।

पुरी ने कहा, "2030 में भारत की शहरी आबादी 60 करोड़ से अधिक होगी। आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में शहर 2030 तक देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 70 प्रतिशत से अधिक का योगदान देंगे।"

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