नयी दिल्ली, सात मई सुशासन के लिये राष्ट्रीय केंद्र (एनसीजीजी) सार्वजनिक नीति और शासन में उसके कार्यक्रमों की मांग बढ़ने के साथ विभिन्न देशों के अधिक लोक सेवकों को प्रशिक्षित करने की अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। संस्थान ने रविवार को यह जानकारी दी।
सरकार द्वारा 2014 में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत शीर्ष स्तर की संस्था के रूप में एनसीजीजी की स्थापना की गई थी।
एनसीजीजी ने एक बयान में कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय (एमईए) के साथ साझेदारी में, एनसीजीजी ने विकासशील देशों के लोक सेवकों की क्षमता का निर्माण करने की जिम्मेदारी ली है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘अब तक, इसने (एनसीजीजी) 15 देशों बांग्लादेश, केन्या, तंजानिया, ट्यूनीशिया, सेशल्स, गाम्बिया, मालदीव, श्रीलंका, अफगानिस्तान, लाओस, वियतनाम, भूटान, म्यांमा, नेपाल और कंबोडिया के लोक सेवकों को प्रशिक्षण दिया है।’’
इसमें कहा गया है कि इन प्रशिक्षणों को विभिन्न देशों के अधिकारियों द्वारा अत्यधिक उपयोगी पाया गया है।
बयान में कहा गया है कि एनसीजीजी देश के विभिन्न राज्यों के लोक सेवकों की क्षमता निर्माण में भी शामिल रहा है।
इसमें कहा गया है, ‘‘इन कार्यक्रमों की बहुत मांग है और विदेश मंत्रालय की इच्छा के अनुसार, एनसीजीजी अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक देशों के लोक सेवकों को समायोजित किया जा सके।’’
बयान में कहा गया है कि वर्ष 2023-24 के लिए, एनसीजीजी ने कार्यक्रमों में तीन गुना वृद्धि की है।
एनसीजीजी के महानिदेशक भरत लाल ने अधिकारियों से लोगों की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी होने का आग्रह किया और समयबद्ध तरीके से सार्वजनिक शिकायतों के निवारण के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच विकास साझेदारी की भी सराहना की और कहा कि यह कार्यक्रम अन्य बातों के अलावा नये विकासात्मक उपायों के लिए प्रतिभागियों को सशक्त बनाने का एक प्रयास है।
लाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’’ के मंत्र पर प्रकाश डाला और लोक सेवकों से नागरिकों और सरकार के बीच की खाई को कम करने का आग्रह किया।
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