देश की खबरें | राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे में सप्ताह में 29 घंटे पढ़ाई का प्रस्ताव;अंतरराष्ट्रीय मानकों पर जोर

नयी दिल्ली, 27 अगस्त शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा पर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (एनसीएफ) तैयार किया है जिसमें स्कूलों में अब सप्ताह में 29 घंटे की पढ़ाई का प्रस्ताव किया गया है । स्कूलों में सोमवार से शुक्रवार तक पांच से साढ़े पांच घंटे की पढ़ाई होगी और इसमें बच्चों को फ्री टाइम भी दिया जाएगा जिसमें वे अपने मन के अनुसार काम कर सकेंगे।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे के तहत स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों के लिए वैश्विक मानकों के आधार पर पढ़ाई के घंटे निर्धारित किये गए हैं। स्कूलों के लिए प्रस्तावित पढ़ाई के नये कार्यक्रम में बच्चों को पठन- पाठन के दबाव से राहत देने की कोशिश की गई है।

स्कूलों में अब सप्ताह में 29 घंटे की पढ़ाई का प्रस्ताव किया गया है जिसमें सोमवार से शुक्रवार तक पांच से साढ़े पांच घंटे की पढ़ाई होगी। महीने में दो शनिवार को भी कुछ घंटे की पढ़ाई होगी तथा रविवार को छुट्टी रहेगी।

एनसीएफ में बच्चों के सम्पूर्ण विकास एवं उपयुक्त माहौल में पढ़ाई के लिए ‘‘ पंचपदी शिक्षण प्रक्रिया’’ अपनाने का सुझाव देते हुए इसमें शिक्षकों से पठन पाठन में किसी विषय को समझाने के लिए परिचय, बोध, अभ्यास, प्रयोग और प्रसार को शामिल करने को कहा गया है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली समिति द्वारा तैयार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा 2023 के अनुसार ‘पंचपदी शिक्षण प्रक्रिया’ के तहत पांच चरणों में अदिति (परिचय), बोध (विषय की समझ), अभ्यास, प्रयोग और प्रसार शामिल हैं।

इसमें कहा गया है कि ‘अदिति’ के स्तर पर शिक्षक अपने छात्रों के साथ संवाद एवं सम्पर्क स्थापित करके नये विषय पेश कर सकते हैं। ‘बोध’ के स्तर पर बच्चे नाटक,चर्चा, पुस्तक पाठ, पूछताछ आदि के जरिये शिक्षकों के मार्गदर्शन में विषयों को समझने का प्रयास करेंगे।

‘अभ्यास’ के स्तर पर कौशल के जरिये बार बार प्रयास करके विषयों एवं सिद्धांतों को समझने एवं समझाने और ‘प्रयोग’ चरण के तहत विभिन्न संसाधनों के जरिये सीखे गए विषयों के बारे में बेहतर समझ बनायी जायेगी।

‘पंचपदी प्रक्रिया’ के तहत प्रसार चरण के अंतर्गत छात्रों के विषयों के बारे में अधिक समझ हासिल करने को महत्व दिया गया है। इसमें मित्रों के साथ बातचीत, एक दूसरे को नयी कहानियां बताकर, नये गाने गाकर, नयी किताबें पढ़कर, नया खेल खेलकर विषयों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जायेगा।

एनसीएफ में कहा गया है कि भारतीय परंपरा में मानव के विकास में ‘पंचकोश विकास’ एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और बच्चे का पूरा आधार ही इस पर निर्भर करता है। इसका मुख्य आयाम बच्चों का शारीरिक, प्राणमय, मानसिक, बौद्धिक और चेतना संबंधी विकास है।

‘पंचकोष विकास’ सिद्धांत में अन्नमय कोश (शारीरिक विकास), प्राणमय कोश (जीवन ऊर्जा का विकास), मनमय कोश (भावनात्मक एवं मानसिक विकास),विज्ञानमय कोश (बौद्धिक विकास और चेतना संबंधी विकास) एवं आनंदमय कोश (प्रेम, करूणा सहित आध्यात्मिक विकास) के तत्व शामिल हैं ।

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